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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली के संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (CSPOC) का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में, उन्होंने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और विविधता को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताया।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्बोधन की मुख्य बातें
- आयोजन और स्थान: 28वां CSPOC सम्मेलन 14 से 16 जनवरी, 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।
- मेजबानी: भारत 1971, 1986 और 2010 के बाद चौथी बार इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जो इसकी संसदीय परंपराओं को दर्शाता है।
- उद्घाटन भाषण: पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने अपनी आजादी के बाद से लोकतंत्र के प्रति सभी आशंकाओं को गलत साबित कर दिया है और दिखाया है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं स्थिरता, गति और पैमाने के साथ परिणाम देती हैं।
- लोकतंत्र की ताकत: उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने विविधता को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत में बदल दिया है, जहां शासन के केंद्र में देश के लोग हैं।
- वैश्विक सहयोग: पीएम मोदी ने ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के लाभ के लिए ओपन-सोर्स तकनीकी प्लेटफॉर्म बनाने के भारत के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला, ताकि साझेदार देश भी भारत जैसी प्रणालियाँ विकसित कर सकें।
- स्पीकर की भूमिका: उन्होंने संसदीय लोकतंत्र में स्पीकर की अनूठी भूमिका पर भी बात की, जिसमें कम बोलने लेकिन सभी को सुनने और अवसर देने की जिम्मेदारी शामिल है।
- सम्मेलन के विषय: सम्मेलन में कई प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो रही है, जिनमें संसदीय कामकाज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सोशल मीडिया का उपयोग, नागरिक भागीदारी बढ़ाना और सांसदों की सुरक्षा व कल्याण शामिल है।
इस सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कर रहे हैं, जिसमें 42 राष्ट्रमंडल देशों के 61 से अधिक अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी भाग ले रहे हैं।
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