Posted inराजनीति, न्यूज

लोकसभा में वापसी पर ओम बिरला का संदेश: संसद में सभी सांसदों को नियमों का पालन करना होगा

OM BIRLA
लोकसभा में वापसी पर ओम बिरला का संदेश: संसद में सभी सांसदों को नियमों का पालन करना होगा
News on WhatsAppJoin Now

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हाल ही में सदन में वापसी करते हुए स्पष्ट कहा कि संसद की कार्यवाही केवल नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही चलेगी। यह बयान उस समय आया जब विपक्ष द्वारा उनके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में ध्वनिमत से खारिज हो गया। इसके बाद उन्होंने पहली बार सदन को संबोधित करते हुए संसदीय परंपराओं और अनुशासन के महत्व पर जोर दिया।

स्पीकर ने कहा कि लोकसभा 140 करोड़ भारतीयों की लोकतांत्रिक इच्छा का प्रतिनिधित्व करती है और यहां आने वाला हर सांसद अपने क्षेत्र के लोगों की उम्मीदों और समस्याओं को लेकर आता है। इसलिए जरूरी है कि सदन की कार्यवाही गरिमा, अनुशासन और नियमों के साथ संचालित हो।

“नियमों से ऊपर कोई नहीं”

ओम बिरला ने अपने संबोधन में साफ कहा कि संसद में किसी को भी विशेष अधिकार नहीं है। चाहे प्रधानमंत्री हों, मंत्री हों, नेता प्रतिपक्ष हों या कोई अन्य सांसद—सभी को सदन में बोलने के लिए नियमों का पालन करना होगा और अध्यक्ष की अनुमति आवश्यक होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा के नियम और प्रक्रियाएं सभी सदस्यों पर समान रूप से लागू होती हैं। सदन में किसी को भी किसी भी समय या किसी भी विषय पर बोलने का स्वतः अधिकार नहीं है। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि सदन की कार्यवाही व्यवस्थित और सार्थक तरीके से चल सके।

निष्पक्षता और लोकतांत्रिक परंपरा पर जोर

स्पीकर बिरला ने कहा कि उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिले। उन्होंने बताया कि कई बार सदन में कम बोलने वाले सांसदों को भी उन्होंने अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित किया है ताकि लोकतंत्र मजबूत हो सके।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्पीकर का पद किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि संसद की परंपरा और संस्था का प्रतीक है। इसलिए इस पद की गरिमा बनाए रखना हर सांसद की जिम्मेदारी है।

लोकतंत्र में सहमति और असहमति दोनों जरूरी

अपने संबोधन के अंत में ओम बिरला ने कहा कि भारतीय संसदीय लोकतंत्र की ताकत यह है कि यहां सहमति और असहमति दोनों की परंपरा है। सांसदों को खुलकर अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन यह सब संसदीय नियमों के भीतर होना चाहिए।

उन्होंने सभी सांसदों से अपील की कि वे सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा के जरिए देशहित के मुद्दों पर आगे बढ़ें, ताकि संसद जनता की आवाज बनकर लोकतंत्र को और मजबूत कर सके।

ALSO READ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बने असहाय लोगों के लिए मसीहा, फर्जी रजिस्ट्री पर लगेगी रोक, सख्त जांच के आदेश