उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने 9 साल के कार्यकाल के दौरान एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मिथक को तोड़ने का दावा किया है, जिसे “नोएडा जिंक्स” कहा जाता था। लंबे समय से यह धारणा थी कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है, उसकी सत्ता चली जाती है। लेकिन योगी आदित्यनाथ ने इस सोच को चुनौती देते हुए न केवल कई बार नोएडा का दौरा किया, बल्कि इसे विकास का प्रमुख केंद्र भी बना दिया।
‘नोएडा जिंक्स’ से विकास की ओर
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले के कई नेता इस डर से नोएडा नहीं जाते थे कि इससे उनकी कुर्सी चली जाएगी। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि “अगर कुर्सी भी चली जाए, तो भी प्रदेश के विकास के लिए नोएडा जाना जरूरी है।” इसी सोच के चलते उन्होंने इस अंधविश्वास को खत्म करने का प्रयास किया और इसे विकास में बाधा नहीं बनने दिया।
नोएडा बना औद्योगिक हब
आज नोएडा और ग्रेटर नोएडा देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्रों में शामिल हो चुके हैं। सरकार का दावा है कि भारत में लगभग 55% मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और 60% इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट उत्पादन उत्तर प्रदेश में हो रहा है, जिसमें नोएडा की बड़ी भूमिका है।
कानून-व्यवस्था और माहौल में बदलाव
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर थी और त्योहारों के दौरान तनाव का माहौल बन जाता था। लेकिन अब नवरात्रि और रमजान जैसे बड़े पर्व शांति और सौहार्द के साथ मनाए जा रहे हैं। इससे प्रदेश की छवि में सुधार हुआ है और लोगों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा है।
जनकल्याण योजनाओं पर फोकस
सरकार ने गरीबों, महिलाओं और युवाओं के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। करीब 1 करोड़ से ज्यादा परिवारों को पेंशन, करोड़ों लोगों को मुफ्त राशन और युवाओं को टैबलेट व रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही, मेधावी छात्राओं के लिए स्कूटी योजना और “मिशन शक्ति” जैसे कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश में तेजी
जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, गंगा एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिली है। सरकार का कहना है कि “जीरो टॉलरेंस” और “जीरो करप्शन” की नीति के कारण विदेशी निवेशक भी यूपी की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
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