झारखंड के किसानों को उनकी फसल का बेहतर और लाभकारी मूल्य दिलाने के उद्देश्य से हेमंत सोरेन सरकार ने खरीफ विपणन सत्र में धान खरीद की तैयारियां तेज कर दी हैं। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने किसानों को दिए जाने वाले राज्य बोनस में बढ़ोतरी करने का बड़ा फैसला लिया है। सरकार अब धान अधिप्राप्ति पर ₹84 प्रति क्विंटल के स्थान पर ₹109 प्रति क्विंटल बोनस देगी।
विभागीय स्तर पर सहमति बनने के बाद अब इस प्रस्ताव को राज्य कैबिनेट की अंतिम मंजूरी के लिए भेजा गया है। खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने विभागीय सचिव राजेश कुमार शर्मा के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर 15 दिसंबर से संभावित धान अधिप्राप्ति की रूपरेखा तय की।
समर्थन मूल्य और बोनस का पूरा गणित
खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिए किसानों को मिलने वाली दरों का विवरण:
सामान्य धान (Common Paddy): केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,441 प्रति क्विंटल है। इसमें राज्य सरकार का ₹109 बोनस जुड़ने के बाद किसानों को कुल ₹2,550 प्रति क्विंटल का भुगतान होगा।
ग्रेड ‘ए’ धान (Grade ‘A’ Paddy): केंद्र का MSP ₹2,461 प्रति क्विंटल है। राज्य के ₹109 बोनस के साथ किसानों को कुल ₹2,570 प्रति क्विंटल मिलेंगे।
अतिरिक्त लाभ: पिछले वर्ष की तुलना में बोनस ₹84 से बढ़ाकर ₹109 किए जाने से किसानों को सीधे प्रति क्विंटल ₹25 का अतिरिक्त फायदा मिलेगा।
40 लाख क्विंटल खरीद का लक्ष्य और ₹43.60 करोड़ का वित्तीय प्रावधान
विभाग ने इस खरीफ मौसम के दौरान राज्यभर से कुल 40 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य तय किया है:
आवश्यकता का आकलन: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) सेंट्रल पूल के लिए 19.60 लाख क्विंटल और झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना (JSFSS) के लिए 19,79,412 क्विंटल धान की जरूरत आंकी गई है। कुल 39.39 लाख क्विंटल की आवश्यकता को देखते हुए इसे राउंड ऑफ कर 40 लाख क्विंटल रखा गया है।
बोनस बजट: 40 लाख क्विंटल धान पर ₹109 प्रति क्विंटल की दर से बोनस भुगतान के लिए राज्य सरकार पर लगभग ₹43 करोड़ 60 लाख का वित्तीय भार आएगा, जिसकी प्रशासनिक स्वीकृति प्रक्रियाधीन है।
सभी 24 जिलों में होगी सुचारु खरीद
धान अधिप्राप्ति का संचालन झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड के माध्यम से किया जाएगा। राज्य के सभी 24 जिलों—रांची, धनबाद, बोकारो, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, पलामू, गढ़वा, हजारीबाग, देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, गुमला, जामताड़ा, खूंटी, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा, पाकुड़, रामगढ़, साहिबगंज, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा और चतरा में क्रय केंद्र बनाए जाएंगे ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में कोई असुविधा न हो।
मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों को बिचौलियों से बचाना, उनकी आय में वृद्धि करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है।
