लोकसभा में बजट सत्र 2026 के दौरान गंभीर राजनीतिक बहसों के बीच हल्के-फुल्के और तीखे पल भी देखने को मिले, जब पीठासीन सदस्य जगदंबिका पाल ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को तंज कसते हुए कहा, “अगर आप मेरी सलाह मानते, तो आज आप वहां विपक्ष में नहीं बैठे होते।” यह टिप्पणी तब सामने आई जब राहुल गांधी बजट से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे, लेकिन उन्होंने संसद में एपस्टीन फाइल्स और अन्य गैर-बजट मुद्दों पर भी चर्चा की कोशिश की। इसके जवाब में जगदंबिका पाल ने उन्हें केवल बजट से संबंधित विषयों पर ही बात करने की सलाह दी।
बजट सत्र में पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस चल रही थी, जिसमें राहुल गांधी ने सरकार पर यूएस-भारत व्यापार समझौता, डेटा सुरक्षा और एपस्टीन फाइल्स जैसे विषय उठाए। इसके चलते सदन में हंगामा भी हुआ, और विपक्ष तथा सरकार के बीच तीखी नोक-झोंक देखने को मिली।
इस दौरान राहुल गांधी ने जगदंबिका पाल को याद दिलाया कि वे कांग्रेस के पूर्व सदस्य रहे हैं, और उन्होंने मज़ाक में कहा कि वह उनके लिए विशेष फ़ेवर करेंगे, जिससे माहौल थोड़ा अप्रत्याशित हो गया। इसके बाद जगदंबिका पाल ने कहा कि अगर राहुल गांधी उनकी पहले सलाह मानते तो वे विपक्ष में नहीं होते।
संसद में बजट बहस का माहौल में राजनीति, आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे
लोकसभा के बजट सत्र में जो राजनीतिक टकराव देखने को मिला, वह पहले ही सुर्खियों में था। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार की नीतियों पर कटाक्ष करते हुए आरोप लगाए कि केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार समझौता जैसे मुद्दों पर देश के हितों से समझौता किया है, जिसे सत्ता पक्ष ने जोरदार तरीके से खारिज किया।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान को “बेतुका” बताया और कहा कि आलोचना रचनात्मक होनी चाहिए। इस दौरान जगदंबिका पाल ने भी राहुल गांधी से कहा कि बजट पर ही चर्चा करें और बजट से जुड़े विषयों पर अधिक ध्यान दें।
संसद के बजट सत्र में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच सख्त शब्दों का प्रयोग, आरोप-प्रत्यारोप और हंगामा देखने को मिला है, जिसमें वीडियो और बहसबाज़ियाँ भी वायरल हुईं। बजट बहस में राहुल गांधी की टिप्पणियाँ—जैसे एपस्टीन, अमेरिकी दबाव और डेटा-सुरक्षा—नेत्रियों को भी चौंका दिया और पटल पर राजनीतिक गतिरोध बढ़ा दिया।
वहीं भाजपा और अन्य सहयोगी नेताओं ने राहुल गांधी की भाषण शैली और आरोपों का कड़ा विरोध किया है, उन्हें संसदीय मर्यादा का उल्लंघन करने वाला बताया है। इससे संसद में राजनीतिक फुटकर लड़ाई और बढ़ गई, जबकि जगदंबिका पाल जैसी टिप्पणियाँ माहौल को थोड़ा हल्का भी कर गईं।
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