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सावधान! आपके दस्तावेजों से जारी हो सकता है फर्जी सिम, डिजिटल अरेस्ट ठगी के पीछे सामने आया बड़ा नेटवर्क

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नया सिम कार्ड खरीदते समय अब पहले से कहीं अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। साइबर अपराधी लोगों के आधार कार्ड, पहचान पत्र और बायोमीट्रिक सत्यापन का दुरुपयोग कर फर्जी सिम सक्रिय करा रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार इन सिम कार्डों का इस्तेमाल विदेशों में बैठे साइबर ठग डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी और अन्य वित्तीय अपराधों के लिए कर रहे हैं। हाल ही में लखनऊ के एक पूर्व एयरपोर्ट निदेशक से लगभग 70 लाख रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी की जांच के दौरान ऐसे ही एक नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इस मामले ने सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दोहरी KYC के जरिए तैयार किए जाते हैं फर्जी सिम

जांच में सामने आया कि कुछ मामलों में ग्राहक के सिम सत्यापन के दौरान तकनीकी समस्या या अन्य बहाने बनाकर एक ही दस्तावेज से दो बार KYC कराई जाती है। पहली KYC से सक्रिय हुआ सिम ग्राहक को दे दिया जाता है, जबकि दूसरी प्रक्रिया से जारी सिम कथित रूप से गिरोह के पास रखा जाता है। बाद में इस सिम को ई-सिम में बदलकर उसका QR कोड तैयार किया जाता है। आरोप है कि यह QR कोड टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से विदेशों में मौजूद साइबर अपराधियों तक पहुंचाया जाता है, जहां से भारतीय मोबाइल नंबर का उपयोग कर लोगों को ठगी का शिकार बनाया जाता है।

70 लाख की ठगी की जांच में खुला पूरा नेटवर्क

पुलिस जांच के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान फर्जी सिम सप्लाई की पूरी कड़ी सामने आई। जांच में यह दावा किया गया कि सक्रिय सिम कार्ड अवैध तरीके से हासिल कर उन्हें आगे दूसरे लोगों को बेचा जाता था। इसके बाद उन्हें ई-सिम में बदलकर विदेश भेजा जाता था। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार कार्रवाई कर रही है। वहीं संबंधित टेलीकॉम कंपनी ने भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई डिस्ट्रीब्यूटर या एजेंट इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो उसकी फ्रेंचाइजी समाप्त करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

नया सिम लेते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों ने लोगों को सिम खरीदते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है। ग्राहक यह सुनिश्चित करें कि बायोमीट्रिक सत्यापन केवल एक बार ही कराया जाए। अपने मोबाइल पर आने वाला OTP किसी के साथ साझा न करें और उसे स्वयं दर्ज करें। सिम सक्रिय होने के बाद यह भी जांच लें कि आपके दस्तावेजों पर केवल वही नंबर जारी हुआ है, जिसके लिए आपने आवेदन किया था। हमेशा अधिकृत टेलीकॉम स्टोर से ही सिम लें और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। थोड़ी सी सतर्कता आपकी पहचान और बैंक खाते दोनों को बड़े साइबर अपराधों से सुरक्षित रख सकती है।