उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक एडिटेड और भ्रामक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने का मामला सामने आया है। तस्वीर को इंस्टाग्राम पर साझा किया गया था। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित इंस्टाग्राम अकाउंट धारक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
तस्वीर में दिखाया गया अलग दृश्य
जानकारी के अनुसार, वायरल की जा रही तस्वीर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के पैर छूते हुए दिखाया गया है। पुलिस के मुताबिक यह तस्वीर वास्तविक नहीं, बल्कि एडिट की गई है। इस तरह की भ्रामक सामग्री के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने से लोगों के बीच गलत संदेश जाने और राजनीतिक विवाद पैदा होने की आशंका जताई गई है।
स्थानीय लोगों से मिली पुलिस को जानकारी
दोहरीघाट थाना क्षेत्र में पुलिस गश्त और जांच के दौरान उपनिरीक्षक महादेव गुप्ता को स्थानीय लोगों से इस पोस्ट के बारे में जानकारी मिली। बताया गया कि ‘लाला राव जी’ नाम के इंस्टाग्राम हैंडल से मुख्यमंत्री की यह कथित फर्जी तस्वीर साझा की जा रही है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और पोस्ट से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को जुटाने की प्रक्रिया शुरू की।
अज्ञात इंस्टाग्राम यूजर पर मुकदमा
पुलिस के अनुसार, उपनिरीक्षक की तहरीर के आधार पर गुरुवार शाम संबंधित धाराओं में अज्ञात इंस्टाग्राम यूजर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि तस्वीर को किसने एडिट किया और इसे सोशल मीडिया पर किस उद्देश्य से साझा किया गया। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी।
साइबर सेल की मदद से होगी पहचान
घोसी के क्षेत्राधिकारी सत्येंद्र भूषण तिवारी ने बताया कि इंस्टाग्राम आईडी के संचालक की पहचान के लिए साइबर सेल की मदद ली जा रही है। पुलिस डिजिटल माध्यमों से पोस्ट के स्रोत और अकाउंट संचालक तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री पर बढ़ी निगरानी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़ी एडिटेड तस्वीरों और वीडियो के मामले हाल के दिनों में सामने आए हैं। इससे पुलिस और साइबर इकाइयों की सोशल मीडिया निगरानी भी महत्वपूर्ण हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी तस्वीर या वीडियो को साझा करने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है, क्योंकि एडिट की गई सामग्री तेजी से फैल सकती है और इससे गलत सूचना का प्रसार हो सकता है। मऊ मामले में भी पुलिस अब पोस्ट की उत्पत्ति और उसके प्रसार से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
