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तेलंगाना निकाय चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत, BRS के हरीश राव ने कहा- कांग्रेस-भाजपा ने मिलकर किया षडयंत्र

कांग्रेस
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तेलंगाना में 11 फरवरी 2026 को हुए नगर निगम और नगरपालिका चुनावों (Urban Local Bodies Elections) में राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी (Congress Party) ने बड़े पैमाने पर जीत दर्ज की है। कुल 123 शहरी निकायों (7 नगर निगम + 116 नगर पालिकाएँ) में से कांग्रेस ने कई प्रमुख पदों पर कब्ज़ा जमाया। कांग्रेस को कई बड़ी शहरों और नगरपालिकाओं में मेज़र और अध्यक्ष पदों पर जीत मिलती दिखी, जिससे पार्टी की राज्य में स्थानीय स्तर पर पकड़ और मजबूत हुई।

चुनाव के प्रारंभिक परिणामों के अनुसार, कांग्रेस ने लगभग 84 नगरपालिकाओं और 6 में से 7 नगर निगमों में जीत दर्ज की है। वहीं, मुख्य विपक्षी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (BRS) को केवल 17 नगरपालिकाओं में सफलता मिली, जबकि भाजपा को एक नगरपालिका में जीत मिली है। कुछ जगहों पर निर्दलियों के समर्थक भी प्रमुख पदों पर चुने गए।

मतदान में राज्यभर में करीब 73 % मतदान हुआ, जो कि स्थानीय निकाय चुनावों में सामान्य से अधिक उत्साह दर्शाता है। चुनाव के बाद, चुने गए प्रधानों और मेयरों ने 16 फरवरी को पद-और-गौरव की शपथ ली। इसके साथ ही कांग्रेस ने स्थानीय प्रशासन में एक मजबूत बहुमत का गठन किया है, जिससे उसकी सियासी स्थिति और मजबूती मिली है।

आरोप और गठजोड़े: कांग्रेस-बीजेपी के बीच रणनीतिक समझौते

चुनाव परिणामों और मेयर/अध्यक्ष चयन के दौरान राजनीतिक विवाद भी सामने आए। BRS के नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और भाजपा ने कई स्थानों पर गुप्त रणनीतिक समझौतों के माध्यम से BRS को सत्ता से बाहर रखा है। BRS नेता टी. हरीश राव और अन्य ने कहा कि दोनों पार्टीयों ने अपनी विचारधाराओं को एक तरफ रखकर सत्ता हासिल करने की कोशिश की है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, कई निकायों में कांग्रेस ने बीजेपी के सहयोग से मेयर और अध्यक्ष पद सुनिश्चित किए, जिससे BRS भारी मतों के बावजूद इन संस्थाओं में सत्ता प्राप्त नहीं कर सकी। ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस-बीजेपी बीच रणनीतिक गठजोड़ ने BRS की संभावित जीत को रोक दिया। कुछ क्षेत्रों में समीकरण इतने जटिल हो गए कि अधिकारियों को भी चुनाव प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी।

इन आरोपों के बीच बीजेपी ने भी अपने कुछ क्षेत्रों में आश्चर्यजनक प्रदर्शन किया, जैसे कि करीमनगर नगर निगम में मेयर की जीत, जो प्रमुख राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।

इन चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय राजनीति में बड़े दलों के बीच रणनीतिक समझौते और गठबंधनों का प्रभाव कितना महत्वपूर्ण है। इससे आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए भी राजनीतिक माहौल प्रभावित हो सकता है।

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