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महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने अर्पित की पुष्पांजलि

YOGI ADITYANATH GANDHI
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने अर्पित की पुष्पांजलि
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30 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें नमन किया। इस अवसर पर वे प्रतिमा के समीप पहुंचे और राष्ट्रपिता के प्रति अपनी श्रद्धा एवं सम्मान प्रदर्शित किया। श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने शांत मन से राष्ट्रपिता के सबसे प्रिय भजन ‘रघुपति राघव राजा राम…’ का मनन किया, जो महात्मा गांधी के विचारों और सामाजिक सद्भावना का प्रतीक रहा है।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, मेयर सुषमा खर्कवाल और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया और सभी ने मिलकर राष्ट्रपिता की शिक्षाओं और आदर्शों को याद किया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने उल्लेख किया कि गांधीजी का जीवन सत्य, अहिंसा और मानवता के सिद्धांतों पर आधारित था, जो आज भी समाज में शांति और सामंजस्य बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि सीएम योगी ने केवल पुष्पांजलि ही नहीं अर्पित की, बल्कि वहां मौजूद सभी के साथ मिलकर भजन “रघुपति राघव राजा राम” का आदरपूर्वक मनन किया। यह भजन न केवल एक धार्मिक गीत है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक एकता और आस्था का प्रतीक भी माना जाता है, जिसे महात्मा गांधी ने अपने आंदोलन में विशेष रूप से लोकप्रिय बनाया था।

रघुपति राघव राजा राम’: एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संदेश

‘रघुपति राघव राजा राम’ भजन का गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह भजन महात्मा गांधी के समय से ही भारतीय समाज में अहिंसा, भाईचारे और प्रेम के भाव को दर्शाता आया है। गांधीजी ने इस भजन को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में जनता के बीच लोकप्रिय बनाया और इसे अपने आंदोलनों में महत्वपूर्ण रूप से शामिल किया।

इसके शब्द और सरलता उस संदेश को व्यक्त करते हैं जो गांधीजी के जीवन का मूल आधार था—सत्य, अहिंसा और सर्वधर्म समभाव। यह भजन हिंदू धर्म के राम चरित्र के आदर्शों पर आधारित है, लेकिन गांधीजी ने इसे उस रूप में अपनाया जिससे सभी समुदायों को जोड़ने और सामाजिक एकता का संदेश फैलाने में मदद मिल सके।

इस प्रकार, सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा ‘रघुपति राघव राजा राम’ का मनन न केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक था, बल्कि यह एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक सन्देश भी था, जो आज के समाज में शांति, सद्भावना और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है।

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