कैमूर जिले के भभुआ प्रखंड स्थित परसिया में आयोजित चातुर्मास महायज्ञ के समापन अवसर पर आयोजित धर्म सम्मेलन को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने बिहार को विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल ‘सोने की चिड़िया’ नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया में दहाड़ने वाला ‘सोने का शेर’ बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर उद्योग-धंधों का संजाल (नेटवर्क) तैयार किया जा रहा है, ताकि बिहार के युवाओं को रोजगार और मजदूरी की तलाश में अपने परिवार को छोड़कर दूसरे राज्यों की ओर पलायन न करना पड़े।
पुराने दौर से आज के बिहार का अंतर
सम्राट चौधरी ने 1990 के दशक के कानून-व्यवस्था के हालात को याद करते हुए कहा:
वर्ष 1998-99 में जब वे कैमूर के दौरे पर आए थे, तो लोगों ने शाम के समय यात्रा करने से मना कर दिया था क्योंकि रास्ते में डकैतों और अपराधियों का डर रहता था।
आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं; राज्य में सुशासन और कानून का राज स्थापित हुआ है।
आज कैमूर की प्राकृतिक वादियों में बॉलीवुड हस्तियां शूटिंग और भ्रमण के लिए पहुंच रही हैं और पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही है, जो राज्य में लौटते विश्वास का प्रमाण है।
उन्होंने विकास की इस यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के सहयोग एवं पूर्व योगदान की भी सराहना की।
उद्योगों का विस्तार और बिहार-झारखंड का इतिहास
मुख्यमंत्री ने बिहार और झारखंड के संयुक्त इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा:
जब बिहार और झारखंड एक थे, तब जमशेदपुर (टाटा), बोकारो स्टील प्लांट और विशाल खनिज संपदा बिहार का हिस्सा थी, फिर भी राज्य की आर्थिक स्थिति उस अनुपात में मजबूत नहीं हो पाई थी।
अब सरकार आधुनिक नीति और इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ बिहार को औद्योगिक केंद्र बनाने में जुटी है, ताकि राज्य की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़े और स्थानीय स्तर पर व्यापक रोजगार सृजित हो सके।
मां मुंडेश्वरी धाम का कायाकल्प और रोपवे निर्माण
कैमूर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने पर्यटन विकास की रूपरेखा रखी:
देश के सबसे प्राचीन जीवंत मंदिरों में शामिल मां मुंडेश्वरी धाम के समग्र विकास और सुविधाओं के विस्तार की योजना पर तेजी से काम हो रहा है।
श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही के लिए मुंडेश्वरी धाम में रोपवे निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देकर कैमूर और शाहाबाद प्रक्षेत्र को नए आर्थिक अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
