केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की घोषणाओं के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP की गतिविधियों को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली में छात्रों और युवाओं के आंदोलन के दौरान CJP प्रमुख संगठनों में शामिल रही। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijeet Dipke) ने कहा कि संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है और आगे भी युवाओं से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे।
इसी बीच रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी (Mohammad Ali Jauhar University) से जुड़ा मामला CJP के एजेंडे में आता दिखाई दे रहा है।
जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर क्या है विवाद?
रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी (Mohammad Ali Jauhar University) के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार (UP Govt) की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ा हुआ है। यूनिवर्सिटी से जुड़े निर्माण और नियमों को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई तथा ध्वस्तीकरण से संबंधित मामले पर विपक्षी नेताओं ने योगी सरकार को घेरा है।
पूर्व जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आलोचना की और यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ खड़े होने की अपील की। अब CJP की ओर से भी इस मुद्दे को उठाए जाने की चर्चा ने मामले को नया राजनीतिक आयाम दे दिया है।
CJP के रुख से योगी सरकार पर बढ़ेगा दबाव
CJP की पहचान हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान तेजी से बनी है। नीट पेपर लीक से जुड़े मुद्दों पर संगठन ने दिल्ली में बड़े प्रदर्शन किए थे और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे को अपनी प्रमुख मांग बनाया था। सरकार के साथ बातचीत के दौरान भी संगठन इस मांग पर कायम रहा। 25 जुलाई को प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP को नई राजनीतिक ताकत मिलने की चर्चा हुई।
ऐसे में यदि संगठन जौहर यूनिवर्सिटी मामले को लेकर उत्तर प्रदेश में आंदोलन तेज करता है, तो योगी सरकार के सामने छात्र और शिक्षा से जुड़े मुद्दे पर नई चुनौती खड़ी हो सकती है।
2027 चुनाव से पहले बढ़ सकती है राजनीतिक हलचल
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाएं, शिक्षा और छात्र हित जैसे मुद्दे पहले ही राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। जौहर यूनिवर्सिटी का मामला इससे जुड़ने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो सकता है। फिलहाल CJP की आगे की रणनीति और उत्तर प्रदेश में संभावित आंदोलन के स्वरूप पर नजर रहेगी।
संगठन पहले ही संकेत दे चुका है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ उसका अभियान समाप्त नहीं हुआ है। दूसरी ओर जौहर यूनिवर्सिटी मामले में विपक्ष भी सरकार पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की सियासत में महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।
