केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने राज्यों के विकास कार्यों और पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को गति देने के लिए केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी के रूप में ₹1,09,019 करोड़ की अग्रिम किस्त जारी की है। इसमें बिहार को ₹10,845 करोड़ की एकमुश्त बड़ी वित्तीय सहायता मिली है। पूरे देश में उत्तर प्रदेश (₹19,579 करोड़) के बाद सबसे ज्यादा राशि पाने वाले राज्यों में बिहार दूसरे स्थान पर रहा है।
इस महत्वपूर्ण वित्तीय आवंटन पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्र सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा:
विकास योजनाओं को मिलेगी अभूतपूर्व गति: केंद्र से समय पर मिली इस अग्रिम राशि से राज्य में चल रही महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण, पुल-पुलिया, सिंचाई और स्वास्थ्य सेवाओं के काम में तेजी आएगी।
वित्तीय दबाव होगा कम: यह किस्त राज्यों को मिलने वाली नियमित मासिक कर हिस्सेदारी से अलग है, जिससे राज्य सरकार के खजाने पर वित्तीय दबाव कम होगा और किसी भी जनहितैषी योजना को फंड की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
डबल इंजन सरकार का लाभ: मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य में एनडीए की सरकार होने से बिहार को केंद्रीय योजनाओं और कर हस्तांतरण का सीधा व त्वरित लाभ मिल रहा है, जिससे ‘विकसित बिहार’ के संकल्प को मजबूती मिल रही है।
प्रमुख राज्यों को मिली राशि का तुलनात्मक विवरण
केंद्र सरकार द्वारा जारी ₹1.09 लाख करोड़ में से विभिन्न राज्यों को आवंटित प्रमुख हिस्सेदारियां:
उत्तर प्रदेश: ₹19,579 करोड़
बिहार: ₹10,845 करोड़
मध्य प्रदेश: ₹8,010 करोड़
पश्चिम बंगाल: ₹7,866 करोड़
महाराष्ट्र: ₹7,022 करोड़
राजस्थान: ₹6,460 करोड़
झारखंड: ₹3,660 करोड़
कहां और कैसे खर्च होगी यह धनराशि?
बुनियादी ढांचा व पूंजीगत निवेश: इस फंड का बड़ा हिस्सा सड़कों के चौड़ीकरण, पुलों के निर्माण और शहरी बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च किया जाएगा।
सामाजिक कल्याण व जनसुविधाएं: ग्रामीण विद्युतीकरण, पेयजल, स्वास्थ्य केंद्रों के आधुनिकीकरण और शिक्षण संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जाएगी।
समय पर भुगतान: ठेकेदारों, निर्माण एजेंसियों और सेवा प्रदाताओं के लंबित भुगतानों का समय पर निपटारा हो सकेगा, जिससे परियोजनाओं की गति अवरुद्ध नहीं होगी।
