पश्चिम बंगाल सरकार ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में बेरोज़गार युवाओं के लिए ‘बंगलर युवा साथी’ (Yuva Sathi) नामक एक नई योजना शुरू की है। यह योजना उन युवाओं को प्रतिमाह ₹1,500 की आर्थिक सहायता देने का लक्ष्य रखती है, जो 21 से 40 वर्ष की आयु के हैं और कम-से-कम माध्यमिक (Class X) परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं लेकिन अभी तक रोजगार नहीं पा सके हैं। इस योजना को स्वनिर्भर बंगला का हिस्सा घोषित किया गया है, और इसे राज्य भर में 294 विधान सभा क्षेत्रों में विशेष पंजीकरण शिविरों के माध्यम से लागू किया जा रहा है।
ममता बनर्जी देंगी बंगाल के युवाओं को ये तोहफा
योजना के तहत पात्र बेरोज़गार युवा पाँच साल तक या नौकरी मिलने तक (जो भी पहले हो) वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं। आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से संभव हैं — जिसमें विशेष शिविरों के अलावा आधिकारिक पोर्टल पर भी पंजीकरण कराया जा सकता है।
पहले दो दिनों में ही राज्य में भारी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। पहले ही दिन लगभग 2 लाख से अधिक युवाओं ने योजना के लिए आवेदन किया, और कुल मिलाकर पहले 48 घंटों में लगभग 13 लाख रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए बताए गए हैं। इनमें से अधिकांश पंजीकरण ऑफ़लाइन शिविरों के माध्यम से हुए, जबकि कुछ आवेदन ऑनलाइन भी दर्ज किए गए हैं। राज्य के मुर्शिदाबाद और कुछ अन्य जिलों में युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से अधिक रही।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: बीजेपी का हमला और विवाद
योजना का शुभारंभ होने के साथ ही राजनीतिक विवाद भी उभर आया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस योजना पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि यह आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर वोट बैंक जीतने की रणनीति है। बीजेपी के नेता अमित मालवीय ने पूछा कि इतने कम समय — सिर्फ 48 घंटों — में इतने बड़े स्तर पर पंजीकरण संभव कैसे हुआ?
उन्होंने कहा कि या तो इन युवाओं के पास बेरोज़गारी का वास्तविक प्रमाण नहीं है या यह एक प्रचारात्मक अभ्यास है। भाजपा का तर्क है कि योजना का मकसद युवा मतदाताओं को लुभाना है, न कि बेरोज़गारों की वास्तविक सहायता।
वहीं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और राज्य सरकार ने इस आरोप का पलटवार करते हुए बीजेपी की बेरोज़गारी पर हमला बोल दिया है। टीएमसी नेता सवाल उठाते हैं कि केंद्र की सरकार ने अब तक कितने रोजगार सृजित किए हैं और बीजेपी की 2 करोड़ नौकरियों के वादे का क्या हुआ? उनका कहना है कि योजना का लक्ष्य सच्चे बेरोज़गारों की मदद करना है और इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए।
