मुंबई के बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इतिहास रच दिया है और पहली बार इस प्रतिष्ठित और अमीर नगर निकाय में बहुमत हासिल कर लिया है। इस परिणाम के साथ लगभग तीन दशक से शिवसेना-प्रमुख नेतृत्व वाले गढ़ में सत्ता का संतुलन बदल गया है। बीजेपी को लगभग 89 सीटें मिलीं, जबकि उनके साथियों के साथ मिलाकर महायुति गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है।
इस जीत के परिणामस्वरूप मुंबई का मेयर पद भी बीजेपी को मिलने की उम्मीद मजबूत हो गई है। बीजेपी के नेताओं ने जीत का श्रेय ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ (केंद्र, राज्य और नगर सरकार का एक ही राजनीतिक दल द्वारा नेतृत्व) को दिया है और कहा है कि जनता ने उनके विकास और प्रशासन के एजेंडा को प्राथमिकता दी है।
ठाकरे-शिंदे और ओवैसी ने BMC में लगाया पूरा दमखम
मुंबई के चुनाव में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने महत्त्वपूर्ण राजनीतिक मिलन करने की कोशिश की थी, लेकिन इस बार उनकी साझा रणनीति व गठबंधन अपेक्षित सफलता नहीं प्राप्त कर सका। ठाकरे समूहों को कुल लगभग 71 सीटें मिलीं, जो विशेष रूप से ‘मराठी मत’ पर आधारित समर्थन को बनाए रखने में सफल रहे, लेकिन पूरे शहर में जीत के लिए पर्याप्त नहीं थीं।
वहीं शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) को लगभग 29 सीटें मिलीं, जिससे यह गठबंधन बीजेपी के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में उभरा है। इस गठबंधन ने मुंबई में सत्ता की कुंजी को बीजेपी के हाथ में दिया है, लेकिन बड़े फैसलों के लिए शिंदे गुट की भूमिका को भी अहम माना जा रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात रही असदुद्दीन ओवैसी के AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन) की बढ़त। इस बार AIMIM ने मुंबई सहित कई इलाकों में अपनी सीटें दोगुनी से भी अधिक कर दी हैं, जिससे पारंपरिक विपक्षी दलों जैसे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है।
कुल मिलाकर यह चुनाव मुंबई की सियासत में बड़ा बदलाव लेकर आया है — जहां लंबे समय तक शिवसेना-केंद्रित राजनीति थी, वहाँ अब बीजेपी-महतयुति गठबंधन का दबदबा स्थापित होता दिख रहा है।
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