अलीगढ़ (Aligarh) में भारतनेट परियोजना से जुड़े कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर पीएनटी यूनियन ने आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों और लंबित मांगों को लेकर यूनियन अब दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी आवाज बुलंद करने की तैयारी में है। आंदोलन के तहत भूख हड़ताल करने की बात भी सामने आई है।
यूनियन का कहना है कि भारतनेट जैसी महत्वपूर्ण परियोजना को जमीनी स्तर पर संचालित करने में कर्मचारियों की अहम भूमिका है, इसलिए उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए। लंबे समय से मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है।
जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल की तैयारी
अपनी मांगों को सरकार और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए कर्मचारी अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल के माध्यम से कर्मचारी अपनी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। पीएनटी यूनियन की ओर से कर्मचारियों को आंदोलन के लिए एकजुट करने की कोशिश की जा रही है।
संगठन का उद्देश्य है कि भारतनेट से जुड़े कर्मचारियों की समस्याओं पर संबंधित विभाग गंभीरता से विचार करे और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए। अलीगढ़ सहित अन्य क्षेत्रों से भी कर्मचारियों के इस आंदोलन में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
ग्रामीण इंटरनेट व्यवस्था में अहम है भारतनेट
भारतनेट केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण डिजिटल कनेक्टिविटी परियोजना है, जिसका उद्देश्य देश की ग्राम पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों तक तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाना है। इस नेटवर्क के संचालन, रखरखाव और तकनीकी व्यवस्था को सुचारू रखने में जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
कर्मचारियों का कहना है कि डिजिटल सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उनके रोजगार और कार्य परिस्थितियों से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। यूनियन इसी आधार पर कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा और उनकी मांगों के समाधान की आवाज उठा रही है।
समाधान नहीं मिला तो आगे बढ़ सकता है आंदोलन
पीएनटी यूनियन के आंदोलन के बाद अब नजर संबंधित विभाग और सरकार के अगले कदम पर रहेगी। कर्मचारियों को उम्मीद है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और भूख हड़ताल के जरिए उनकी मांगें उच्च स्तर तक पहुंचेंगी। यूनियन का प्रयास है कि समस्या का समाधान बातचीत से निकले और कर्मचारियों को आंदोलन लंबा न करना पड़े।
वहीं मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है। भारतनेट ग्रामीण भारत को डिजिटल रूप से जोड़ने वाली बड़ी परियोजना है, ऐसे में इससे जुड़े कर्मचारियों की मांग और आंदोलन दोनों महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
अब यह देखना होगा कि यूनियन की मांगों पर संबंधित अधिकारी क्या फैसला लेते हैं और कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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