समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित FCRA संशोधन बिल 2026 को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने के नाम पर गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) पर दबाव बनाना चाहती है और उनकी संपत्तियों पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है।
अखिलेश यादव ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इस तरह के कानून से स्वतंत्र संस्थाओं की कार्यशैली प्रभावित होगी और सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा।
इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर Akhilesh Yadav ने उठाए बड़े सवाल
अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे को भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने पूछा कि जब चुनावी बॉन्ड योजना को अवैध घोषित किया जा चुका है, तो इसके जरिए प्राप्त धन को वैध कैसे माना जा सकता है।
उन्होंने सीधे तौर पर सवाल किया—भाजपा बताए कि इलेक्टोरल बॉन्ड से मिला पैसा कब वापस किया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता को लेकर देशभर में बहस जारी है।
PM CARES फंड पर भी सवाल
सपा प्रमुख ने प्रधानमंत्री राहत कोष (PM CARES Fund) में आए विदेशी चंदे को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या इस फंड में विदेशों से आया पैसा भी वापस किया जाएगा या उसे विशेष छूट देकर रखा जाएगा।
अखिलेश यादव का कहना है कि सरकार को इन सभी फंड्स का स्पष्ट हिसाब देना चाहिए, ताकि जनता को सच्चाई पता चल सके।
NGO फंडिंग और पारदर्शिता पर बहस
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार FCRA कानून के जरिए NGO सेक्टर को नियंत्रित करना चाहती है। उनके मुताबिक, इससे सामाजिक संगठनों की स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा और लोकतंत्र कमजोर होगा।
इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है।
राजनीतिक टकराव तेज होने के संकेत
अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के इन सवालों ने केंद्र और विपक्ष के बीच टकराव को और तेज कर दिया है। जहां एक ओर विपक्ष पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है, यह देखना अहम होगा।
