झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन नई दिल्ली में विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन द्वारा आयोजित विशेष ‘मॉक पार्लियामेंट’ (प्रतीकात्मक जन संसद) में शामिल हुए। यह आयोजन रविवार को ऐतिहासिक रामलीला मैदान में होने वाली विपक्षी महारैली की पूर्व संध्या पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सरकारी आवास पर किया गया।
इस मॉक पार्लियामेंट में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जन महाभियोग प्रस्ताव’ पर चर्चा की गई और विपक्षी नेताओं ने संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता, मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन पर अपनी बात रखी।
मॉक संसद की मुख्य बातें
मीरा कुमार ने निभाई स्पीकर की भूमिका:
संसद के इस प्रतीकात्मक सत्र का संचालन पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने किया। उन्होंने अपने चिर-परिचित शांत और गंभीर अंदाज में कार्यवाही का संचालन करते हुए कहा कि वोटर ही लोकतंत्र की आत्मा है और यदि किसी एक नागरिक को भी उसके मताधिकार से वंचित किया जाता है, तो यह लोकतंत्र पर गहरा आघात है।
सीईसी के खिलाफ जन महाभियोग प्रस्ताव:
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह प्रमुख आरोपों के साथ जन महाभियोग प्रस्ताव पेश किया, जिसमें मतदाता सूचियों से कथित तौर पर नाम हटाने और चुनावी पारदर्शिता से समझौते के आरोप लगाए गए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का वक्तव्य
मॉक पार्लियामेंट में सहभागिता के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए कहा:
“इस दौरान विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों और नागरिकों ने SIR के दौरान आम लोगों को हो रही परेशानियों तथा मताधिकार की रक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाया। चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही लोकतंत्र में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है।”
रामलीला मैदान महारैली की पृष्ठभूमि
यह आयोजन विपक्षी दलों की साझा एकजुटता के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के साथ दिल्ली पहुंचे हैं। इस बैठक के बाद 1 नवंबर को रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ महारैली आयोजित की जा रही है, जहां विपक्षी गठबंधन के शीर्ष नेता केंद्र सरकार की नीतियों और चुनावी विसंगतियों के खिलाफ संयुक्त हुंकार भरेंगे।
