बिहार में नदियों की बाढ़ का पानी उतरने के बाद खेतों में जमा हुई रेत, बालू और गाद की समस्या से जूझ रहे किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा वित्तीय फैसला लिया है। सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि कृषि योग्य भूमि और मत्स्य प्रक्षेत्रों से सिल्ट (गाद) और बालू हटाने के लिए प्रभावित किसानों को ₹18,000 प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बचाना और उनकी जमीन को रबी फसल की बुआई के लिए शीघ्र तैयार करने में मदद करना है।
सहायता राशि और पात्रता के मुख्य बिंदु
प्रति हेक्टेयर दर: कृषि योग्य भूमि और जलकृषि/मत्स्य प्रक्षेत्रों में 3 इंच से अधिक बालू या गाद जमा होने पर किसानों को ₹18,000 प्रति हेक्टेयर की सहायता मिलेगी।
न्यूनतम सहायता: छोटे और सीमांत किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए प्रत्येक पात्र किसान को कम से कम ₹2,200 की न्यूनतम सहायता राशि सीधे बैंक खाते में दी जाएगी।
फसल क्षति से अलग सहायता: सामान्यतः आपदा के समय केवल उन्हीं किसानों को कृषि इनपुट अनुदान मिलता था जिनकी खड़ी फसल बर्बाद होती थी। जिन खेतों में रेत जमा होने से वे बंजर हो जाते थे, उनके लिए सहायता का अभाव था। यह नई पहल सीधे खेतों को उपजाऊ बनाने के लिए खर्च की भरपाई करेगी।
आपदा प्रबंधन विभाग का निर्देश: 22 जिलों में होगा सत्यापन
मुख्यमंत्री के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग ने गंगा, कोसी, गंडक, सोन और अन्य नदियों के जलस्तर बढ़ने से प्रभावित कुल 22 जिलों के जिलाधिकारियों (DM) को प्रभावित क्षेत्रों का भौतिक/स्थलीय सत्यापन कराने का आदेश जारी किया है।
स्थलीय सर्वेक्षण और आकलन के दायरे में शामिल 22 जिले:
पटना
भोजपुर
सारण
वैशाली
भागलपुर
बेगूसराय
बक्सर
समस्तीपुर
मुंगेर
कटिहार
लखीसराय
खगड़िया
पूर्णिया
मधेपुरा
अरवल
पश्चिम चंपारण
पूर्वी चंपारण
गोपालगंज
दरभंगा
मुजफ्फरपुर
सुपौल
सहरसा
जिला प्रशासन द्वारा तैयार रिपोर्ट के आधार पर राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) के निर्धारित मानकों के तहत आवश्यक राशि आवंटित की जाएगी, जिससे किसानों को सीधे राहत मिल सकेगी।
