दिव्य प्रेम सेवा मिशन हरिद्वार के सेवा प्रकल्पों को समर्पित ‘जाणता राजा’ के चौथे दिन दर्शकों की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ी। गाजियाबाद का सनसिटी जय भवानी, जय शिवाजी के उद्घोष से गूंज उठा। विश्व के सबसे बड़े महानाट्य के महामंचन के चौथे दिन तेलंगाना के राज्यपाल श्री शिवप्रताप शुक्ल ने युवाओं में जोश भरा। महानाट्य के महामंचन के चौथे दिन पतंजलि आय़ुर्वेद के प्रमुख आचार्य बालकृष्ण, श्री दूधेश्वर नाथ मठ के श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज, सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी जी, मंगलम ट्रस्ट देवघर के आचार्य प्रदीप भैया जी समेत कई महानुभावों ने छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत को याद किया।
दिव्य प्रेम सेवा मिशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गौतम ने गाजियाबाद में ‘जाणता राजा’ के आयोजन का उद्देश्य बताते हुए कहा कि आज इतनी बड़ी तादाद में आप सबको यहां देखकर विश्वास हो गया है कि शिवाजी महाराज ने गाजियाबाद के श्रीदूधेश्वर नाथ महादेव मठ आकर 1666 में यहां से हिंदवी स्वराज्य का जो संकल्प लिया था, वो अब पूरा हो रहा है। कार्यक्रम में जिस तरह गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद, दिल्ली, उत्तराखंड और हरियाणा से बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं, उससे साफ है, सभी लोगों ने दिखा दिया है कि आपकी रगों में छत्रपति शिवाजी महाराज के संस्कार प्रवाहित हो रहे हैं। गाजियाबाद में ‘जाणता राजा’ के आयोजन के पीछे यहां से जुड़ा छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास है। साल 1666 में आगरा से औरंगजेब की कैद से अपनी बुद्धि और युक्ति से छूटने के बाद शिवाजी महाराज सबसे पहले गाजियाबाद के श्रीदूधेश्वर नाथ मठ पहुंचे थे, यहां उन्होंने यज्ञ और हवन किया था, श्री दूधेश्वर नाथ मठ से ही शिवाजी ने हिंदवी स्वराज का संकल्प लिया था जो 6 जून 1674 को उनके राज्याभिषेक के साथ पूरा हुआ।
तेलंगाना के राज्यपाल श्री शिवप्रताप शुक्ल ने दिव्य प्रेम सेवा मिशन से अपने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि वह मिशन से उसी दिन से जुड़े हुए हैं जब 12 जनवरी 1997 को डॉ. आशीष गौतम के नेतृत्व में कुष्ठरोगियों और समाज के वंचित लोगों की सेवा का संकल्प लिया गया था।
दिव्य प्रेम सेवा मिशन की कार्यपद्धति इस विचार पर आधारित है कि जरूरतमंद मनुष्य की सेवा ही सच्ची मानव सेवा है। श्री शुक्ल ने कहा कि मेरा आप सबसे फिर यही कहना है कि छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास सभी को कंठस्थ होना चाहिए और इसका काम महानाटक से बेहतर और कौन हो सकता है। आप लोग इस महानाट्य को देखें, अपने परिवार को दिखाएं और लोगों को प्रेरित करें, सोशल मीडिया पर इससे जुड़े अनुभव साझा करें ताकि हिंदवी स्वराज्य की आन-बान शान को याद करने के लिए महानाट्य जाणता राजा को देखने दूसरे लोग भी जरूर जाएं। आज से 350 वर्ष पहले हिन्दवी स्वराज की स्थापना शिवाजी ने की थी, उसका ही नतीजा है कि आज हिंदुस्तान मौजूद है, सनातन धर्म जिंदा है।
श्री शुक्ल ने कहा कि हम सब आभारी हैं पद्म विभूषण बाबासाहेब पुरंदरे के जिनकी प्रेरणा से 1980 के दशक से इसका मंचन शुरू हुआ और इसने देश-विदेश में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन को प्रस्तुत करने के लिए व्यापक पहचान हासिल की। बाबा साहेब पुरंदरे ने शिवाजी महाराज के जीवन और इतिहास को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए अपना लंबा जीवन समर्पित किया था। अब इसे आगे बढ़ाने की हमारी आप सबकी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में पहुंचे पतंजलि आय़ुर्वेद के प्रमुख आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि आज सनसिटी में आप लोग जाणता राजा महानाट्य के साक्षी बने हैं, ये सब आपका पुण्य प्रताप है, छत्रपति शिवाजी महाराज की तरफ आने वाली पीढ़ियों को दिए गए ज्ञान और संदेश को अपने आचरण में उतारिये । छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़े इस नाटक को सिर्फ आंखों से नहीं बल्कि आत्मा से देखिए।
महानाट्य के महामंचन के चौथे दिन उत्तर प्रदेश बीजेपी के उपाध्यक्ष कामेश्वर सिंह, ग्रेट वैल्यू ग्रुप के चेयरमैन मनोज अग्रवाल, जाणता राजा आय़ोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार गुप्ता, संयोजक विनय चौधरी, आयोजन समिति के सदस्य उदयवीर सिंह, आयोजन समिति के महामंत्री दीपक शर्मा, पूर्व सांसद रमेश विधूड़ी, आयोजन समिति के सदस्य विकास पुंडीर और दिव्य प्रेम सेवा मिशन के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. संजय चतुर्वेदी समेत समाज के तमाम प्रबुद्ध नागरिक और हजारों दर्शन मौजूद रहे। महानाट्य के पूर्व मंच का संचालन अभय पाल जी ने किया। ‘जाणता राजा’ महानाट्य के मीडिया पार्टनर भारत एक्सप्रेस की टीम समेत मीडिया के कई दिग्गज मौजूद रहे।
