उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में इंडिया (INDIA) गठबंधन के प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट मार्च को लेकर कांग्रेस व विपक्षी दलों पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव में हार मिलते ही ईवीएम और भारत निर्वाचन आयोग (EC) पर दोष मढ़ना कांग्रेस की पुरानी आदत बन चुकी है। जब भी विपक्ष किसी चुनाव में जीत दर्ज करता है, तो वह उसे अपनी योग्यता और काबिलियत बताता है, लेकिन जब जनता उन्हें नकार देती है, तो वे तुरंत संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाने लगते हैं। उन्होंने इस दोहरे रवैये को लोकतंत्र के लिए अत्यंत घातक करार दिया।
सड़कों पर अराजकता और आम जनता की परेशानी
सीएम योगी ने विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन के तौर-तरीकों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के नाम पर राजधानी की सड़कों पर अराजकता का माहौल पैदा किया जा रहा है, जिससे आम जनता को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। मेट्रो स्टेशनों का बंद होना और सड़कों पर घंटों जाम लगना सीधे तौर पर नागरिकों के दैनिक जीवन को प्रभावित करता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश की जागरूक जनता इस प्रकार की अराजक राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेगी। विरोध के नाम पर संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार करना पूरी तरह अनुचित है।
अविश्वास से भरे नेतृत्व को बदलने की दी नसीहत
कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी को अपने भ्रष्ट आचरण और अविश्वास से भरे नेतृत्व से मुक्ति पानी चाहिए। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की साख गिराने की कोशिश कांग्रेस की सोची-समझी मंशा का हिस्सा बन चुकी है। देश की न्यायपालिका, चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं पूरी दुनिया में अपनी पारदर्शिता के लिए जानी जाती हैं। ऐसे में बार-बार उन पर बेबुनियाद आरोप लगाकर देश में भ्रम फैलाना किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक दल को शोभा नहीं देता। विपक्ष को नकारात्मक राजनीति छोड़कर रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
जनता से कटी राजनीति का भविष्य अंधकारमय
मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विपक्षी दलों ने अपनी यह विघटनकारी सोच और नकारात्मक कार्यशैली नहीं बदली, तो आने वाले समय में जनता उन्हें पूरी तरह खारिज कर देगी। उन्होंने कहा कि आज विपक्ष के पास जो थोड़ी-बहुत राजनीतिक जमीन बची है, वह भी उनके इसी रवैये के कारण धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी। जनता अब विकास, सुरक्षा और सुशासन के नाम पर मतदान करती है, न कि आधारहीन बयानों और सड़कों पर किए जाने वाले ड्रामे के आधार पर। लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान करना ही हर राजनीतिक दल का पहला कर्तव्य होना चाहिए।
