Posted inन्यूज, उत्तर प्रदेश, राजनीति

गुमशुदा बच्चों की वापसी के बाद भी सरकार रखेगी ख्याल, योगी सरकार ने बाल संरक्षण पर बढ़ाया फोकस

CM Yogi Adityanath
आजमगढ़ में CM Yogi Adityanath का विपक्ष पर हमला कहा सपा ने “विकास सिर्फ सैफई तक सीमित रखा”
News on WhatsAppJoin Now

उत्तर प्रदेश सरकार ने गुमशुदा और संकट में फंसे बच्चों की सुरक्षा को लेकर अपनी बाल संरक्षण व्यवस्था पर जोर दिया है। सरकार का कहना है कि किसी बच्चे को तलाश कर परिवार तक पहुंचाना ही जिम्मेदारी का अंतिम चरण नहीं है। जरूरत के अनुसार बच्चे की काउंसलिंग, संरक्षण और पुनर्वास की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। बाल हेल्पलाइन 1098 के जरिए बच्चों से जुड़ी समस्याओं को दर्ज कर संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।

1098 पर हजारों मामलों का निस्तारण

एबीपी की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जनवरी से 1 अगस्त 2026 के बीच बाल हेल्पलाइन पर बच्चों से संबंधित कुल 55,791 मामले प्राप्त हुए। इनमें से 51,402 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। आंकड़ों के अनुसार, करीब 19,811 मामले बच्चों के गुम होने से संबंधित थे, जिनमें 18,230 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया।

बच्चों के मिलने के मामलों पर भी कार्रवाई

हेल्पलाइन पर बच्चों के मिलने से संबंधित 8,714 मामले भी दर्ज हुए। इनमें से 8,335 मामलों का समाधान किया गया। सरकार की बाल संरक्षण व्यवस्था में अब बच्चे के मिलने के बाद उसके परिवार से सुरक्षित पुनर्मिलन के साथ-साथ उसकी परिस्थितियों और जरूरतों का आकलन करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

काउंसलिंग और पुनर्वास पर जोर

गुमशुदगी या किसी संकटपूर्ण परिस्थिति से गुजरने वाले बच्चों पर मानसिक और भावनात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे मामलों में जरूरत के अनुसार काउंसलिंग उपलब्ध कराने और बच्चों को संरक्षण एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चे को परिवार में लौटने के बाद सामान्य जीवन में वापस आने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है।

विभागों के बीच समन्वय की व्यवस्था

बाल हेल्पलाइन 1098 को बच्चों की समस्याओं और शिकायतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। गुमशुदगी के अलावा बच्चों से जुड़ी अन्य समस्याओं की जानकारी भी हेल्पलाइन पर प्राप्त होती है। इन मामलों में संबंधित विभागों और संस्थाओं के समन्वय से आवश्यक कार्रवाई की जाती है।

हर सूचना को गंभीरता से लेने पर जोर

महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति के अनुसार, बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। उनके मुताबिक गुमशुदा बच्चों से संबंधित प्रत्येक सूचना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जाती है। इसमें बच्चे की तलाश, सुरक्षित वापसी और परिवार से पुनर्मिलन के साथ जरूरत के अनुसार काउंसलिंग और पुनर्वास भी शामिल है।

यूपी पुलिस पोर्टल पर भी सुविधा

उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर लापता व्यक्तियों और बच्चों से संबंधित पोर्टल और संसाधनों के लिंक उपलब्ध हैं। पुलिस वेबसाइट पर लापता बच्चों के लिए नेशनल ट्रैकिंग सिस्टम और संबंधित पोर्टल की जानकारी दी गई है। इसके अलावा चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 भी उपलब्ध कराया गया है।

सुरक्षित बचपन के साथ भविष्य पर नजर

सरकार की मौजूदा व्यवस्था में गुमशुदा बच्चों को खोजने के साथ उनके सुरक्षित भविष्य पर भी ध्यान देने की बात कही गई है। बच्चे की स्थिति के अनुसार परिवार से पुनर्मिलन, काउंसलिंग, संरक्षण और पुनर्वास को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इससे बाल संरक्षण व्यवस्था को केवल तत्काल खोज और वापसी तक सीमित रखने के बजाय बच्चे की आगे की जरूरतों से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है।