उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। सपा ने चुनाव आयोग से मामले का संज्ञान लेने और मुख्यमंत्री को नोटिस जारी करने की मांग की है।
72 जिलों में आचार संहिता लागू होने का दावा
सपा के ज्ञापन के मुताबिक, 22 सितंबर को विधान परिषद की छह शिक्षक और पांच स्नातक सीटों के चुनाव की घोषणा के साथ ही संबंधित 72 जिलों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई। कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव को इससे अलग बताया गया है।
3567 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देने पर सवाल
शिकायत में 22 सितंबर को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम का उल्लेख किया गया है। सपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने 3,567 शिक्षकों और शैक्षणिक पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए। पार्टी का कहना है कि विधान परिषद चुनाव में शिक्षक और स्नातक मतदाता महत्वपूर्ण हैं, इसलिए इस कार्यक्रम से मतदाताओं पर प्रभाव पड़ने की संभावना थी।
10 लाख घरों की घोषणा का भी जिक्र
सपा ने अपने ज्ञापन में 24 सितंबर के एक कार्यक्रम में 10 लाख लोगों को घर उपलब्ध कराने की घोषणा का भी मुद्दा उठाया है। पार्टी ने इसे भी आदर्श आचार संहिता के दायरे में जांचे जाने की मांग की है। इसके अलावा 23 सितंबर को भारत टैक्सी के उद्घाटन कार्यक्रम का भी शिकायत में उल्लेख किया गया है।
मुख्यमंत्री और मंत्रियों के कार्यक्रमों की वीडियोग्राफी की मांग
समाजवादी पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सभी मंत्रियों के कार्यक्रमों की वीडियोग्राफी कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि रिकॉर्डिंग के आधार पर यह देखा जाए कि कहीं आदर्श चुनाव आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग
सपा प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन अखिलेश यादव के निर्देश पर सपा नेताओं केके श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चंद्र सिंह यादव और राधेश्याम सिंह ने सौंपा। पार्टी ने कहा है कि यदि जांच में आचार संहिता का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब आयोग के निर्णय पर नजर
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में चुनाव आयोग की ओर से इस शिकायत पर किसी अंतिम कार्रवाई या निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए मुख्यमंत्री पर लगाए गए आरोपों को शिकायतकर्ता पार्टी के आरोप के रूप में ही देखा जाना है। आगे आयोग की जांच या प्रतिक्रिया से मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
चुनाव के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज
विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी बढ़ती दिखाई दे रही है। सपा की शिकायत के बाद अब निगाहें निर्वाचन अधिकारियों की प्रक्रिया और संभावित प्रतिक्रिया पर हैं। आचार संहिता से जुड़े किसी भी मामले में अंतिम स्थिति संबंधित चुनावी प्राधिकरण की जांच और निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
