उत्तर प्रदेश में अस्पतालों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और नर्सिंग होम का फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि चिकित्सा संस्थानों में आग से बचाव की व्यवस्थाओं की गहन जांच की जाए और जहां भी कमियां मिलें, उन्हें समयबद्ध तरीके से दूर कराया जाए।
सुरक्षा मानकों की होगी जांच
फायर सेफ्टी ऑडिट के दौरान अस्पतालों में आग से बचाव के लिए उपलब्ध संसाधनों और व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। इसमें अग्निशमन उपकरण, आग बुझाने की व्यवस्था, आपातकालीन निकास, बिजली से जुड़ी सुरक्षा और मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा। अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति को देखते हुए अग्निकांड की स्थिति में त्वरित बचाव व्यवस्था बेहद जरूरी मानी जाती है।
आईसीयू और संवेदनशील वार्डों पर विशेष ध्यान
अस्पतालों में आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, नवजात शिशु वार्ड और अन्य संवेदनशील विभागों में आग लगने की स्थिति सामान्य इमारतों की तुलना में ज्यादा गंभीर हो सकती है। इन स्थानों पर मरीजों को तुरंत बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण होता है। इसलिए सुरक्षा जांच के दौरान ऐसे वार्डों में मौजूद अग्निशमन व्यवस्था और आपातकालीन निकासी मार्गों को विशेष रूप से देखा जाएगा।
कमियां मिलने पर होगी कार्रवाई
सरकार का उद्देश्य केवल कागजी जांच तक सीमित रहना नहीं है। ऑडिट में यदि किसी अस्पताल में सुरक्षा मानकों की कमी पाई जाती है तो संबंधित संस्थान को आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन हो। गंभीर लापरवाही सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है।
अस्पताल कर्मचारियों को भी होना होगा तैयार
अग्नि सुरक्षा केवल उपकरण लगाने तक सीमित नहीं है। किसी आपात स्थिति में अस्पताल के कर्मचारियों को यह पता होना चाहिए कि मरीजों को सुरक्षित तरीके से कैसे बाहर निकाला जाए और आग बुझाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल कैसे किया जाए।
इसलिए अस्पतालों में नियमित मॉक ड्रिल और सुरक्षा प्रशिक्षण भी महत्वपूर्ण होगा। खासकर उन कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना जरूरी है जो आईसीयू और अन्य संवेदनशील वार्डों में तैनात रहते हैं।
मरीजों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता
अस्पतालों में भर्ती मरीज अक्सर खुद से तेजी से बाहर निकलने की स्थिति में नहीं होते। ऐसे में आग जैसी आपदा के दौरान अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। सरकार का यह कदम चिकित्सा संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फायर सेफ्टी ऑडिट के जरिए अस्पतालों में मौजूद कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा। इससे न केवल मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि अस्पताल कर्मचारियों के लिए भी सुरक्षित वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी। उत्तर प्रदेश में सभी चिकित्सा संस्थानों की सुरक्षा जांच को गंभीरता से लागू करना अब प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
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