उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ जल्द ही भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और सैन्य इतिहास का एक नया राष्ट्रीय केंद्र बनने जा रही है। गोमतीनगर स्थित नेहरू एन्क्लेव के पास करीब 33.97 एकड़ भूमि पर रक्षा मंत्रालय और लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के संयुक्त प्रयास से लगभग ₹125 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक वॉर म्यूजियम और विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर का निर्माण किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य देश की सैन्य विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाना और लखनऊ को पर्यटन तथा सम्मेलन गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाना है। शासन स्तर पर परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद अब भूमि हस्तांतरण की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
तीन हिस्सों में विकसित होगा पूरा परिसर
एलडीए ने इस परियोजना को आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में तैयार किया है। कुल भूमि को तीन भागों में विभाजित किया जाएगा। लगभग 12.87 एकड़ क्षेत्र में वॉर म्यूजियम, 270 डिग्री इमर्सिव ऑडिटोरियम और आधुनिक कन्वेंशन सेंटर बनाया जाएगा। करीब 14 एकड़ भूमि को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे परिसर पर्यावरण के अनुकूल बना रहे। वहीं 7.10 एकड़ जमीन पर व्यावसायिक और मिश्रित उपयोग के प्लॉट विकसित किए जाएंगे। इन प्लॉटों की बिक्री से प्राप्त होने वाले राजस्व से परियोजना के निर्माण खर्च की भरपाई की जाएगी, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
डिजिटल तकनीक से जीवंत होगा सैन्य इतिहास
प्रस्तावित वॉर म्यूजियम पारंपरिक संग्रहालयों से बिल्कुल अलग होगा। यहां प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध, 1947-48, 1962, 1965, 1971 और कारगिल युद्ध सहित भारत के प्रमुख सैन्य अभियानों की जानकारी आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से प्रस्तुत की जाएगी। 3D प्रोजेक्शन मैपिंग, इंटरैक्टिव डिजिटल डिस्प्ले और ऑडियो-विजुअल तकनीक के जरिए आगंतुकों को युद्ध के वास्तविक अनुभव का अहसास कराया जाएगा। इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर, बालाकोट एयर स्ट्राइक, उरी सर्जिकल स्ट्राइक, सियाचिन में सेना के साहसिक अभियानों तथा भारतीय नौसेना और वायुसेना की उपलब्धियों पर भी विशेष गैलरियां बनाई जाएंगी।
युवाओं के लिए आकर्षण और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
परिसर में हेलीकॉप्टर और टैंक सिम्युलेटर लगाए जाएंगे, जहां लोग सैन्य उपकरणों के संचालन का आभासी अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। ओपन एयर डिस्प्ले क्षेत्र में सेवानिवृत्त टैंक, तोपें और अन्य रक्षा उपकरण प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके साथ ही मिलिट्री स्मारिका केंद्र और युवाओं को सेना में करियर के लिए प्रेरित करने वाला डिजिटल गाइडेंस जोन भी बनाया जाएगा। एलडीए के अनुसार, भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू होगा और इसे दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना पूरी होने के बाद इसका संचालन और रखरखाव एलडीए करेगा। माना जा रहा है कि इससे लखनऊ में पर्यटन, निवेश, रोजगार और राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों को नई गति मिलेगी तथा शहर की पहचान एक आधुनिक रक्षा विरासत केंद्र के रूप में और मजबूत होगी।
