Posted inउत्तर प्रदेश, राजनीति

मायावती के पुराने दांव को योगी ने किया फिर जिंदा, भदोही बना संत रविदास नगर, यूपी में तेज हुई दलित सियासत

News on WhatsAppJoin Now

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दलित राजनीति को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भदोही जिले का नाम फिर से संत रविदास नगर करने की घोषणा की है। यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि संत रविदास के नाम पर जिले की पहचान स्थापित करने की पहल पहले मायावती सरकार ने की थी। अब योगी सरकार उसी नाम को वापस लाकर संत रविदास की विरासत और सामाजिक समरसता को प्रमुखता देने का संदेश दे रही है। इस घोषणा को आगामी चुनाव से पहले भाजपा की दलित समुदाय तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

मायावती सरकार ने रखा था संत रविदास नगर नाम

भदोही को अलग जिले के रूप में 1994 में बनाया गया था। बाद में मायावती सरकार ने 4 दिसंबर 1997 को इसका नाम संत रविदास नगर कर दिया। मायावती के शासनकाल में संत रविदास सहित दलित समाज से जुड़े महापुरुषों और प्रतीकों को राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर विशेष महत्व दिया गया। संत रविदास के नाम पर जिले का नामकरण भी इसी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया। बाद में दिसंबर 2014 में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार ने जिले का नाम बदलकर फिर भदोही कर दिया। मायावती ने उस समय इस फैसले का विरोध भी किया था।

योगी के फैसले के पीछे क्या है राजनीतिक संदेश?

योगी आदित्यनाथ की घोषणा को केवल नाम परिवर्तन तक सीमित करके नहीं देखा जा रहा। उत्तर प्रदेश में दलित मतदाता चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में संत रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर जिले का पुराना नाम वापस लाने की घोषणा के जरिए भाजपा सामाजिक समरसता के साथ दलित समुदाय को बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश करती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री ने पिछली सपा सरकार के नाम बदलने के फैसले पर भी निशाना साधा। भाजपा के नेताओं ने इसे संत रविदास के सम्मान की पुनर्स्थापना बताया है।

2027 से पहले दलित वोटों पर बढ़ेगी राजनीतिक जंग

उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक लंबे समय से बसपा की राजनीति का मजबूत आधार रहा है। हालांकि पिछले चुनावों में भाजपा सहित दूसरे दलों ने भी दलित मतदाताओं के अलग-अलग वर्गों में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश की है। ऐसे में संत रविदास नगर की वापसी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा, बसपा और सपा के बीच दलित राजनीति की प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकती है। मायावती पहले ही सत्ता में लौटने पर भदोही का नाम संत रविदास नगर करने की बात कह चुकी थीं। अब योगी सरकार की घोषणा ने वही मुद्दा भाजपा के राजनीतिक एजेंडे में ला दिया है। नाम बदलने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसका प्रशासनिक असर दिखेगा, लेकिन इसका राजनीतिक संदेश अभी से चर्चा के केंद्र में आ गया है।