उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही जिले का नाम एक बार फिर संत रविदास नगर करने की घोषणा की है। वाराणसी में भाजपा के ‘समरसता संकल्प अभियान’ के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संत गुरु रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर सरकार इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि भदोही पहले संत रविदास नगर के नाम से जाना जाता था और अब उस नाम को फिर बहाल किया जाएगा। यह घोषणा संत रविदास की विरासत और सामाजिक समरसता को सम्मान देने से जोड़कर पेश की गई है।
1997 में रखा गया था संत रविदास नगर नाम
भदोही के नाम का इतिहास पहले भी राजनीतिक बदलावों से जुड़ा रहा है। जिले का गठन 1994 में हुआ था। इसके बाद 4 दिसंबर 1997 को मायावती सरकार ने इसका नाम बदलकर संत रविदास नगर किया था। यह नाम लंबे समय तक कायम रहा। हालांकि दिसंबर 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार ने कैबिनेट बैठक में इसका नाम फिर भदोही करने का निर्णय लिया। अब करीब 12 साल बाद योगी सरकार ने संत रविदास नगर नाम वापस लाने की घोषणा की है।
सपा सरकार के फैसले पर सीएम योगी का हमला
घोषणा के दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली समाजवादी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने संत रविदास के नाम पर बने जिले का नाम बदलने के फैसले को अन्याय बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को जोड़ने वाले संतों और महापुरुषों को सम्मान देना सरकार की प्राथमिकता है। योगी ने अपने संबोधन में बाबर और औरंगजेब का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर भी राजनीतिक हमला किया। ऐसे में जिले का नाम बदलने की घोषणा प्रशासनिक फैसले के साथ राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गई है।
महापुरुषों की प्रतिमाओं की सुरक्षा का भी ऐलान
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में संत रविदास के अलावा महर्षि वाल्मीकि और डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे महापुरुषों की सार्वजनिक प्रतिमाओं की सुरक्षा को लेकर भी घोषणा की। जिन प्रतिमाओं पर छतरी नहीं है, वहां सरकार अपने खर्च पर छतरी बनवाएगी और संबंधित पार्कों में जरूरत के अनुसार बाउंड्री वॉल बनाई जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के प्रत्येक जिले में आवासीय मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय स्थापित करने की बात कही, जिन्हें संत गुरु रविदास को समर्पित किया जाएगा। फिलहाल भदोही का नाम बदलने की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़नी बाकी है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब सरकारी स्तर पर आवश्यक कार्रवाई पूरी होने पर जिला फिर संत रविदास नगर के नाम से जाना जाएगा।
