उत्तर प्रदेश की योगी सरकार (CM Yogi) ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों की शिक्षा को आर्थिक मजबूती देने के लिए छात्रवृत्ति (Scholarship) व्यवस्था का विस्तार किया है। सरकारी जानकारी के अनुसार, पिछले नौ वर्षों में पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से 1.39 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को आर्थिक सहायता दी गई है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य आर्थिक परेशानी के कारण किसी मेधावी विद्यार्थी की पढ़ाई प्रभावित न होने देना है। विद्यालय स्तर से उच्च शिक्षा तक विद्यार्थियों को पढ़ाई जारी रखने में आर्थिक मदद देकर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
डिजिटल व्यवस्था से बढ़ाई गई पारदर्शिता
छात्रवृत्ति वितरण को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने तकनीक आधारित कई व्यवस्थाएं लागू की हैं। इनमें ओटीआर, बायोमेट्रिक सत्यापन, एस-कोड वैलिडेशन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) शामिल हैं। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से पात्र विद्यार्थियों की पहचान और सत्यापन के बाद छात्रवृत्ति की रकम सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। सरकार का दावा है कि डिजिटल प्रक्रिया से वितरण में पारदर्शिता बढ़ी है और पात्र विद्यार्थियों तक आर्थिक सहायता समय पर पहुंचाने में मदद मिली है।
2025-26 में भी लाखों छात्रों को मिलेगा Scholarship का लाभ
पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के तहत वर्ष 2017-18 में अनुसूचित जाति के 4,16,860 विद्यार्थियों को लाभ दिया गया था। 2023-24 में यह संख्या 3,74,963, 2024-25 में 4,11,797 और 2025-26 में बढ़कर 4,39,647 रही। वहीं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत 2017-18 में 12,80,515 विद्यार्थियों को सहायता मिली थी। वर्ष 2023-24 में 10,35,766, 2024-25 में 11,76,281 और 2025-26 में 11,54,567 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ दिया गया। ये आंकड़े बताते हैं कि हर साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी योजना से जुड़े हैं।
शिक्षा के जरिए सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण पर जोर
योगी सरकार का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामाजिक और आर्थिक बदलाव का मजबूत आधार है। छात्रवृत्ति (Scholarship) के माध्यम से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के बेहतर अवसरों की ओर आगे बढ़ने में सहायता देने का प्रयास किया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक आनंद कुमार सिंह के अनुसार, बीते नौ वर्षों में छात्रवृत्ति व्यवस्था में किए गए सुधारों से विद्यार्थियों का शिक्षा के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है।
सरकार की कोशिश है कि पात्र छात्र-छात्राओं को समय पर आर्थिक मदद मिले, ताकि आर्थिक अभाव उनके सपनों और शिक्षा के बीच बाधा न बने। छात्रवृत्ति व्यवस्था को तकनीक से जोड़कर सरकार लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया को और मजबूत करने पर जोर दे रही है।
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