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“हमे जिन्ना नही गन्ना पसंद है” CM योगी के इस बयान के बाद सपा, कांग्रेस और एआईएमआईएम में तिलमिलाहट, तेज हुई सियासत

Yogi Adityanath Jinnah
"हमे जिन्ना नही गन्ना पसंद है" CM योगी के इस बयान के बाद सपा, कांग्रेस और एआईएमआईएम में तिलमिलाहट, तेज हुई सियासत
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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने एक कार्यक्रम के दौरान मोहम्मद अली जिन्ना (Muhammad Ali Jinnah) को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और एआईएमआईएम पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ये दल समय-समय पर जिन्ना की विचारधारा से जुड़े लोगों का समर्थन करते रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने कहा कि देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रहित सर्वोपरि हैं तथा राजनीति को राष्ट्र निर्माण के मूल्यों के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।

विपक्षी दलों ने किया Yogi Adityanath पर पलटवार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के बयान के बाद समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और एआईएमआईएम ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी जनता के मूल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के राजनीतिक बयान दे रही है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

वहीं भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि इतिहास और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर स्पष्ट रुख रखना आवश्यक है।

राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज

जिन्ना को लेकर दिए गए इस बयान के बाद प्रदेश में राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर बयान जारी किए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मुद्दे अक्सर चुनावी और वैचारिक बहस का हिस्सा बन जाते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक विरासत और सुरक्षा जैसे विषयों को अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल करते रहे हैं, जबकि विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार की आलोचना करता रहा है। ऐसे में इस बयान ने एक बार फिर राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक मतभेद को सामने ला दिया है।

बयान को लेकर चर्चा जारी

मुख्यमंत्री के बयान और विपक्ष की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। विभिन्न दल अपने-अपने दृष्टिकोण से इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में भी इस विषय पर बयानबाजी जारी रह सकती है।

फिलहाल भाजपा इसे राष्ट्रहित और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से जुड़ा मुद्दा बता रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक विमर्श का हिस्सा मानते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर वैचारिक बहस को तेज कर दिया है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

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