मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ती गर्मी और घटते जल स्तर के कारण कई जिलों में पानी का संकट गहराता जा रहा है। राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोगों को पीने के पानी के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर हैंडपंप सूख चुके हैं, जबकि तालाब और कुएं भी लगभग खाली हो गए हैं। इसी स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को तुरंत कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
हर जिले में बनेगा पेयजल कंट्रोल रूम
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य के सभी जिलों में “पेयजल कंट्रोल रूम” स्थापित करने के आदेश दिए हैं। इन कंट्रोल रूम का उद्देश्य पानी से जुड़ी शिकायतों को तुरंत दर्ज करना और उनका तेजी से समाधान करना होगा। सरकार चाहती है कि लोगों को पानी की समस्या के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े और प्रशासन सीधे उनकी मदद कर सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी के मौसम में किसी भी नागरिक को पीने के पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन, नगर निगम और पंचायत स्तर पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।
टैंकरों के जरिए पहुंचाया जाएगा पानी
जहां जल स्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं, वहां पानी के टैंकर भेजने की व्यवस्था की जा रही है। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां नियमित रूप से पानी पहुंचाया जाए। ग्रामीण इलाकों में विशेष ध्यान देने के लिए भी कहा गया है, क्योंकि वहां पानी की समस्या सबसे ज्यादा देखी जा रही है।
इसके अलावा खराब पड़े हैंडपंपों और पाइपलाइन की मरम्मत तेजी से करने के आदेश भी दिए गए हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को 24 घंटे निगरानी रखने को कहा गया है।
लोगों से पानी बचाने की अपील
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से भी पानी का सही उपयोग करने और बेवजह बर्बादी रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है, इसलिए जल संरक्षण बेहद जरूरी है। सरकार वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण योजनाओं पर भी काम तेज करने की तैयारी कर रही है।
प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट कहा कि पानी जैसी मूलभूत जरूरत को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड में जाकर स्थिति का जायजा लेने और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
राज्य सरकार का मानना है कि समय रहते उठाए गए कदमों से जल संकट को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासनिक स्तर पर इन निर्देशों का कितना प्रभावी तरीके से पालन किया जाता है।
