उत्तर प्रदेश में बकरीद 2026 को लेकर राज्य सरकार ने इस बार कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की सरकार ने साफ किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर जानवरों की कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी और धार्मिक आयोजन के नाम पर सड़कों को बाधित करने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि त्योहार शांतिपूर्ण और कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए मनाया जाना चाहिए।
सार्वजनिक जगहों पर कुर्बानी पर रोक
सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक स्थल, सड़क, पार्क या खुले क्षेत्र में जानवरों की कुर्बानी नहीं दी जा सकेगी। प्रशासन ने कहा है कि कुर्बानी केवल निर्धारित और अधिकृत स्थानों पर ही की जाएगी। स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इस नियम का सख्ती से पालन कराने के आदेश दिए गए हैं।
राज्य सरकार का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी देने से कई बार विवाद और अव्यवस्था की स्थिति पैदा होती है। इसी को देखते हुए इस बार पहले से ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं ताकि त्योहार के दौरान किसी प्रकार का तनाव न हो।
सड़कों पर नमाज और जाम पर भी निगरानी
सरकार ने यह भी कहा है कि त्योहार के दौरान किसी भी हालत में सड़कें बाधित नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि नमाज या अन्य धार्मिक गतिविधियों के कारण ट्रैफिक प्रभावित न हो। अगर कहीं भी सड़क जाम या अवैध कब्जे जैसी स्थिति बनती है तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। कई जिलों में शांति समिति की बैठकें भी शुरू कर दी गई हैं ताकि सभी समुदायों के बीच समन्वय बना रहे।
सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की नजर
बकरीद के दौरान सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट, अफवाह या आपत्तिजनक सामग्री फैलाने वालों पर भी सरकार सख्त नजर रखेगी। साइबर सेल और स्थानीय पुलिस को लगातार मॉनिटरिंग करने के आदेश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहें अक्सर माहौल खराब करती हैं, इसलिए इस बार पहले से तैयारी की गई है।
शांतिपूर्ण त्योहार पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से कहा है कि त्योहार आपसी भाईचारे और शांति के साथ मनाया जाए। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी धार्मिक आयोजनों पर नजर रखी जाए और कानून व्यवस्था से कोई समझौता न किया जाए।
सरकार के इन निर्देशों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि नियम सभी के लिए समान हैं और उनका उद्देश्य केवल शांति और व्यवस्था बनाए रखना है।
