Posted inउत्तर प्रदेश, राजनीति

योगी सरकार में पुलिस एनकाउंटर: 9 साल में 17 हजार से ज्यादा कार्रवाई

News on WhatsAppJoin Now

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की सरकार लगातार कानून-व्यवस्था को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनाती रही है। हाल ही में सामने आए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 9 वर्षों में राज्य में 17,043 पुलिस एनकाउंटर किए गए। सरकार का कहना है कि इन कार्रवाइयों ने अपराधियों में डर पैदा किया और संगठित अपराध पर लगाम लगाने में मदद की।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इन एनकाउंटर में कई अपराधी घायल हुए, जबकि अनेक को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का दावा है कि कई बड़े गैंग और माफिया नेटवर्क कमजोर पड़े हैं। सबसे ज्यादा एनकाउंटर वाले जिलों में मेरठ और वाराणसी का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है।

सरकार का दावा: अपराधियों में डर

राज्य सरकार का कहना है कि 2017 के बाद से अपराध नियंत्रण के लिए “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई गई। इसी रणनीति के तहत पुलिस ने गैंगस्टर, माफिया और वांछित अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए। अधिकारियों का दावा है कि इससे हत्या, लूट और अपहरण जैसे अपराधों में कमी देखने को मिली।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार सार्वजनिक मंचों से यह कह चुके हैं कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार समर्थकों का मानना है कि इसी वजह से निवेश और व्यापार का माहौल बेहतर हुआ है।

विपक्ष ने उठाए सवाल

हालांकि, विपक्षी दल इन एनकाउंटरों को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे दलों ने आरोप लगाया है कि कई मामलों में पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच नहीं हुई। विपक्ष का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर मानवाधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

मानवाधिकार संगठनों ने भी समय-समय पर कुछ एनकाउंटर मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि हर कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में होनी चाहिए ताकि किसी निर्दोष को नुकसान न पहुंचे।

कानून-व्यवस्था बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कानून-व्यवस्था हमेशा बड़ा मुद्दा रही है। योगी सरकार अपनी सख्त छवि को चुनावी ताकत के रूप में पेश करती रही है, जबकि विपक्ष इसे “डर की राजनीति” बताता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनकाउंटर की यह नीति जनता के एक बड़े वर्ग को प्रभावित करती है। कुछ लोग इसे अपराध नियंत्रण के लिए जरूरी कदम मानते हैं, जबकि कुछ इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताते हैं।

आने वाले समय में भी यूपी की राजनीति में कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा चर्चा के केंद्र में बना रहने की संभावना है।