मध्य प्रदेश एक बार फिर देशभर में वन्यजीव संरक्षण को लेकर चर्चा में है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav आज कूनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से लाई गई दो मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़ने जा रहे हैं। इस कदम को ‘प्रोजेक्ट चीता’ के लिए बड़ा पड़ाव माना जा रहा है। राज्य सरकार का दावा है कि मध्य प्रदेश अब सिर्फ “टाइगर स्टेट” नहीं बल्कि देश का नया “वाइल्डलाइफ लीडर” बनकर उभर रहा है।
कूनो बना देश का सबसे बड़ा चीता केंद्र
श्योपुर स्थित Kuno National Park आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। यहां पहले नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों को बसाया गया था। अब बोत्सवाना से आई मादा चीतों को जंगल में छोड़ने की तैयारी पूरी हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे चीतों की प्राकृतिक गतिविधियां बढ़ेंगी और प्रजनन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
वन विभाग के अनुसार कूनो में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राज्य सरकार इसे दुनिया के बड़े चीता संरक्षण मॉडल के रूप में विकसित करना चाहती है। यही वजह है कि यहां आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम, सुरक्षा व्यवस्था और वन्यजीव प्रबंधन पर तेजी से काम किया जा रहा है।
टाइगर स्टेट से वाइल्डलाइफ लीडर तक
मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण को पर्यटन, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ रही है। पिछले डेढ़ वर्षों में कई बड़े फैसले लिए गए हैं। रातापानी को नया टाइगर रिजर्व घोषित किया गया, वहीं माधव टाइगर रिजर्व को भी नई पहचान मिली।
सरकार अब गांधी सागर और नौरादेही अभयारण्य को भी चीता लैंडस्केप के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इससे मध्य प्रदेश में वन्यजीव पर्यटन को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
गिद्ध संरक्षण में भी बना नंबर वन
चीतों के साथ-साथ मध्य प्रदेश गिद्ध संरक्षण में भी देश में अग्रणी बनता जा रहा है। राज्य में 14 हजार से ज्यादा गिद्ध मौजूद बताए जा रहे हैं। भोपाल के केरवा क्षेत्र में घायल गिद्धों के लिए विशेष रेस्क्यू सेंटर संचालित किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि जैव विविधता संरक्षण को लेकर प्रदेश लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि इसी तरह वैज्ञानिक प्रबंधन और राजनीतिक इच्छाशक्ति बनी रही तो मध्य प्रदेश आने वाले वर्षों में भारत का सबसे बड़ा वन्यजीव संरक्षण मॉडल बन सकता है।
