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मोहन यादव का मास्टरस्ट्रोक! सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा ने बढ़ाई सियासी हलचल

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से “सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा” के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस यात्रा में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए लगभग 1100 श्रद्धालु शामिल हुए, जो गुजरात स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के दर्शन के लिए रवाना हुए।

यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, गौरव और ऐतिहासिक चेतना से जुड़ा एक विशेष अभियान मानी जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को देश की प्राचीन विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ना है।

सीएम मोहन यादव ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की “अटूट आस्था और स्वाभिमान” का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह यात्रा नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति की जड़ों से जोड़ने का माध्यम बनेगी। सीएम ने यह भी कहा कि हजारों वर्षों के संघर्ष और कई आक्रमणों के बावजूद सोमनाथ मंदिर आज भी भारत की आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक बनकर खड़ा है।

उन्होंने यात्रियों से आग्रह किया कि वे इस यात्रा को केवल दर्शन तक सीमित न रखें, बल्कि भारतीय सभ्यता के इतिहास और सांस्कृतिक चेतना को भी समझें। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार लगातार धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है।

क्यों खास है “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व”?

साल 2026 में “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” का आयोजन विशेष महत्व रखता है। यह आयोजन सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले ऐतिहासिक आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया जा रहा है। इसके साथ ही मंदिर के पुनर्निर्माण और स्वतंत्र भारत में उसके पुनर्जीवन की स्मृति को भी सम्मान दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री Narendra Modi भी इस पर्व में शामिल होकर इसे भारत की सांस्कृतिक अस्मिता और आत्मबल का प्रतीक बता चुके हैं।

यात्रा से मिलेगा सांस्कृतिक संदेश

यात्रा के दौरान श्रद्धालु केवल सोमनाथ मंदिर के दर्शन ही नहीं करेंगे, बल्कि धार्मिक अनुष्ठानों, भजन संध्या, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आध्यात्मिक आयोजनों में भी हिस्सा लेंगे। सरकार का मानना है कि इससे लोगों में राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव की भावना मजबूत होगी।

सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा रहा है। यह पहल धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।