उत्तर प्रदेश की राजनीति में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” एक बार फिर केंद्र में आ गया है। योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने विधानसभा के विशेष सत्र में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। यह अधिनियम महिलाओं को राजनीति में 33% आरक्षण देने से जुड़ा है, जिसे केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक कदम बताया है।
विशेष सत्र में गरमाई बहस
यूपी विधानसभा के विशेष सत्र में इस अधिनियम को लेकर निंदा प्रस्ताव लाया गया। बहस की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ( Yogi Adityanath) ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने पुराने मामलों का जिक्र करते हुए विपक्ष की नीतियों को “महिला विरोधी” बताया।
योगी ( Yogi Adityanath) ने कहा कि जब संसद में महिला आरक्षण से जुड़े प्रयासों को झटका लगा, तब कुछ विपक्षी दलों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उनके अनुसार, यह दर्शाता है कि विपक्ष की प्राथमिकता में महिलाओं का सशक्तिकरण कभी प्रमुख मुद्दा नहीं रहा।
नारी सशक्तिकरण बनाम राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
इस मुद्दे पर जहां सत्तापक्ष इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति करार दे रहा है। कुछ विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार केवल कानून का प्रचार कर रही है, लेकिन इसके लागू होने में देरी हो रही है।
दरअसल, “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के तहत महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने का प्रावधान है, लेकिन इसकी वास्तविक लागू प्रक्रिया जनगणना और परिसीमन से जुड़ी हुई है।
Yogi Adityanath ने बताया क्या होगा राजनीतिक और सामाजिक असर
इस अधिनियम को लेकर जारी बहस का असर केवल विधानसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर की राजनीति में भी गूंज रहा है। एक ओर इसे महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने वाला ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है, तो दूसरी ओर इसके क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह कानून प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे नीति निर्माण में महिलाओं की आवाज मजबूत होगी और समाज में लैंगिक संतुलन बेहतर होगा।
ALSO READ: योगी आदित्यनाथ की शादी अनुदान योजना, OBC बेटियों की शादी में योगी सरकार बनी सहारा
