मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर सरकार लगातार सक्रिय नजर आ रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने खरगोन जिले के एक गेहूं उपार्जन केंद्र पर अचानक पहुंचकर निरीक्षण किया। उनका यह दौरा पूरी तरह औचक था, जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों में हलचल मच गई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल खरीदी प्रक्रिया का जायजा लिया, बल्कि किसानों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याओं को भी सुना।
किसानों की समस्याओं को सुना
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों से बातचीत करते हुए जाना कि उन्हें खरीदी केंद्रों पर किस प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई किसानों ने लंबी प्रतीक्षा, तकनीकी दिक्कतों और व्यवस्थाओं की कमी की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए और सभी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए।
व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने केंद्र पर मौजूद सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि सभी खरीदी केंद्रों पर छाया, पीने के पानी और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही, यदि कहीं प्रक्रिया धीमी है या तकनीकी खामी है, तो उसे तुरंत ठीक किया जाए। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसान बिना किसी परेशानी के अपनी फसल बेच सकें।
औचक निरीक्षण की नई पहल
सरकार ने गेहूं खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए औचक निरीक्षण की रणनीति अपनाई है। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री कभी भी किसी भी केंद्र पर बिना सूचना के पहुंच सकते हैं, जिससे व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। इस कदम से अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी और किसानों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
MSP और खरीदी व्यवस्था
राज्य में गेहूं की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2625 रुपये प्रति क्विंटल पर की जा रही है। साथ ही, प्रत्येक केंद्र की क्षमता तय की गई है ताकि खरीदी प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से हो सके। सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को बिना देरी के उचित मूल्य मिले और उन्हें अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की बाधा न आए।
सरकार का किसान हित पर फोकस
मध्य प्रदेश सरकार ने इस वर्ष गेहूं खरीदी को लेकर कई नए कदम उठाए हैं, जैसे अधिक खरीदी केंद्रों की स्थापना और प्रक्रियाओं को सरल बनाना। इन प्रयासों से यह स्पष्ट है कि सरकार किसानों के हितों को प्राथमिकता दे रही है और उन्हें बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह औचक निरीक्षण केवल एक दौरा नहीं, बल्कि किसानों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और जवाबदेही का संकेत है। इससे न केवल खरीदी व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि किसानों का भरोसा भी मजबूत होगा।
