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योगी आदित्यनाथ का महिला आरक्षण पर बड़ा अभियान, पूरे यूपी में जागरूकता की तैयारी

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर पूरे राज्य में व्यापक अभियान छेड़ने का ऐलान किया है। हाल ही में लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित न हो पाने के बाद यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बन गया है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने न केवल विरोध जताया, बल्कि महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में बड़े जनआंदोलन की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

महिला अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरी सरकार

लखनऊ में आयोजित ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ में खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। इस मार्च में हजारों महिलाओं और पार्टी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया, जो महिला आरक्षण के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। Bharatiya Janata Party के नेताओं और सहयोगी दलों ने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण का विरोध महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने इसे महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया और कहा कि राज्य सरकार हर स्तर पर महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

‘नारी शक्ति वंदन’ को लेकर बढ़ा राजनीतिक ताप

महिला आरक्षण विधेयक, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से जाना जाता है, का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना है। हालांकि हाल ही में यह विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका, जिससे देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई।

योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने का फैसला किया है। उनका मानना है कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों से जुड़ा सवाल है। इसी कारण राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई जा रही है।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार पहले से ही महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चला रही है। अब महिला आरक्षण के समर्थन में यह अभियान महिलाओं को राजनीतिक रूप से और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

आने वाले दिनों में पूरे उत्तर प्रदेश में रैलियां, पदयात्राएं और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी, जिनके जरिए महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा।

इस अभियान के जरिए योगी सरकार एक स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि महिला सशक्तिकरण केवल नीतियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जनआंदोलन का रूप दिया जाएगा।