उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर ब्लड बैंकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने छापेमारी कर सात ब्लड बैंकों के संचालन पर रोक लगा दी। इस कार्रवाई ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
ब्लड बैंकों में छापेमारी से सामने आई गंभीर लापरवाही
एफएसडीए की टीम ने शहर के करीब 25 ब्लड बैंकों पर अचानक छापेमारी की। जांच के दौरान सात ब्लड बैंकों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद तत्काल प्रभाव से उनके संचालन पर रोक लगा दी गई।
जांच में सामने आया कि कई ब्लड बैंकों में खून की गुणवत्ता की ठीक से जांच नहीं हो रही थी। सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए सतही टेस्ट किए जा रहे थे। इतना ही नहीं, कई जगहों पर डॉक्टर तक मौजूद नहीं थे और रक्त से जुड़ा कोई पुख्ता रिकॉर्ड भी नहीं रखा जा रहा था।
मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़
छापेमारी के दौरान यह भी पाया गया कि ब्लड बैग की गुणवत्ता की जांच नहीं की जा रही थी और खून के संग्रहण व वितरण में भी गंभीर खामियां थीं। यह स्थिति सीधे तौर पर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ के बराबर मानी गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बिना सही जांच के खून मरीजों को दिया जाए तो एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में यह लापरवाही बेहद खतरनाक साबित हो सकती थी।
सरकार का सख्त संदेश
एफएसडीए अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि मरीजों की सुरक्षा से समझौता करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। जिन ब्लड बैंकों में अनियमितताएं मिली हैं, उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है और सुधार के बाद ही दोबारा संचालन की अनुमति दी जाएगी।
यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले ने यह भी उजागर किया कि ब्लड बैंकों की निगरानी प्रणाली में कहीं न कहीं कमी रही है। लंबे समय से नियमों की अनदेखी हो रही थी, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हो पाई। अब उम्मीद की जा रही है कि इस सख्त कार्रवाई के बाद अन्य ब्लड बैंकों में भी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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