न्यू START: परमाणु हथियारों के नियमन और वैश्विक स्थिरता को लेकर 2026 में बड़ी डिप्लोमैटिक गतिविधियाँ जारी हैं। अमेरिका ने परमाणु हथियारों से संबंधित मामलों पर रूस और चीन के प्रतिनिधिमंडलों के साथ जेनेवा, स्विट्ज़रलैंड में बैठकें शुरू की हैं, जो दुनिया भर में सुरक्षा और हथियार नियंत्रण की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं।
यह बैठकें विशेष रूप से उस समय महत्वपूर्ण हैं जब न्यू START नामक परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता हाल ही में समाप्त हो गया है।
न्यू START संधि का महत्व और समाप्ति
न्यू START (Strategic Arms Reduction Treaty) संधि अमेरिका और रूस के बीच 2011 में लागू हुई थी, जिसका मकसद दोनों देशों के रणनीतिक परमाणु हथियारों की संख्या को सीमित करना था। यह दुनिया के सबसे बड़े दो परमाणु भंडारों पर नियंत्रण के लिए अंतिम बचे समझौते में से एक थी। इसका औपचारिक समय 5 फरवरी, 2026 को समाप्त हो गया है, जिससे अमेरिका और रूस के बीच हथियारों की सीमाओं पर लागू कानूनी नियंत्रण समाप्त हो गया है।
न्यू START की समाप्ति के बाद, परमाणु हथियार नियंत्रण के मौजूदा ढांचे पर प्रश्न खड़े हो गए हैं और इससे संभवतः एक नई लगातार बढ़ती हथियार होड़ की आशंका बनी है। अमेरिका और रूस दशकों से परमाणु नियंत्रण समझौतों के माध्यम से अपने arsenals को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब इस प्रणाली में बड़ा अंतराल आया है।
जेनेवा में तीन-तरफा वार्ता का उद्देश्य
अमेरिका ने इस माह की शुरुआत में रूस और चीन के साथ जेनेवा में “विस्तृत” बैठकें शुरू की हैं, जिनमें सोमवार को पहले रूस के प्रतिनिधियों से बात हुई और अगले दिन चीन के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा होगी। इन बैठकों का लक्ष्य एक भविष्य की संभावित बहुपक्षीय परमाणु हथियार नियंत्रण संधि के लिए रूपरेखा तैयार करना बताया जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ये अब तक की केवल तैयारी बैठकें नहीं हैं, बल्कि अधिक गहन और रणनीतिक बातचीत का हिस्सा हैं।
अमेरिका का कहना है कि न्यू START में कई कमियाँ थीं, खासकर इसमें चीन जैसे तीसरे परमाणु शक्ति वाले देश को शामिल नहीं किया गया था, जबकि बीजिंग का परमाणु भंडार लगातार बढ़ रहा है। इसलिए, अमेरिका चाहता है कि कोई भी नया नियंत्रण ढांचा तीनों देशों — अमेरिका, रूस और चीन — को एक साथ शामिल करे।
चीन की प्रतिक्रिया और स्थिति
चीन ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिया है कि वह कोई भी परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता में शामिल नहीं होगा, यह कहते हुए कि उसके पास अभी अमेरिका और रूस की तुलना में कम परमाणु क्षमताएँ हैं और वह परमाणु हथियारों की दौड़ में भाग लेने वाला देश नहीं है। इससे यह स्पष्ट होता है कि तीन-तरफा समझौते पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा।
वैश्विक प्रभाव और आगे का मार्ग
न्यू START की समाप्ति के बाद वैश्विक सुरक्षा पर चिंता बढ़ी है। अमेरिका और रूस के बीच पहले से ही उच्च संख्या में परमाणु हथियार हैं, और अब अगर चीन को भी शामिल किया जाए तो तीनों महाशक्तियों के बीच हथियार नियंत्रण समझौता और भी जटिल हो सकता है। इससे वैश्विक सुरक्षा संतुलन, परमाणु अप्रसार और भविष्य की हथियार संधियों की दिशा पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
विश्लेषक मानते हैं कि आने वाले महीनों में इन चर्चा-बैठकों का नतीजा वैश्विक राजनीति, निरस्त्रीकरण प्रयासों और रक्षा नीति पर गहरा असर डाल सकता है, क्योंकि न्यू START के बिना दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के बीच पारदर्शिता और नियंत्रण की प्रणाली फिलहाल कमजोर दिखाई देती है।
