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महोबा विवाद: भाजपा के ही भीतर सियासी टकराव, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का पार्टी के अंदर ही विरोध बढ़ा

स्वतंत्र देव सिंह
महोबा विवाद: भाजपा के ही भीतर सियासी टकराव, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का पार्टी के अंदर ही विरोध बढ़ा
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स्वतंत्र देव सिंह: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर ही भारी राजनीतिक तनाव देखने को मिला है। पार्टी के ही एक विधायक द्वारा सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह (Swatantra Dev Singh) के काफिले को रोकने और उनके खिलाफ विरोध जताने के बाद मामला सुर्खियों में है। यह घटना पार्टी के भीतर असंतोष और कार्यों को लेकर उठ रहे सवालों को उजागर करती है।

क्या हुआ महोबा में? विरोध क्यों बढ़ा?

महोबा में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह जब जलशक्ति विभाग के कार्यक्रम के लिए आए थे, तब चरखारी के भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत ने उनका काफिला बीच सड़क पर रोक दिया। इसका मुख्य कारण था ग्रामीण इलाकों में जल जीवन मिशन और “हर घर जल” योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने वाले कार्यों के बाद बदहाल सड़कों और पेयजल आपूर्ति की कमी को लेकर विधायक का नाराजगी जताना। राजपूत ने आरोप लगाया कि निर्धारित योजनाएं सही तरीके से लागू नहीं हुई हैं और जनता को पानी व मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

विरोध इतना तीव्र हुआ कि भाजपा विधायक और उनके समर्थकों ने मंत्री के साथ तीखी बहस भी की, कुछ जगहों पर बताया गया कि पुलिस और समर्थकों के बीच हल्का विवाद या धक्का-मुक्की तक देखने को मिली। इसके बाद दोनों नेता जिला कलेक्टरेट तक गए और डीएम स्तर पर बैठक भी हुई।

राजपूत ने बताया कि उन्होंने मंत्री स्वतंत्र देव सिंह से ग्रामीण सरपंचों से मिलकर समस्याओं का समाधान करने की मांग की, क्योंकि कई गांवों में नल जल सुविधा नहीं पहुंची है, जबकि सरकार की ओर से इसके लागू होने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सवाल प्रधानमंत्री मोदी की प्रधानमंत्री का महत्वाकांक्षी योजना का सही कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

पूर्व विधायक का बयान और राजनीतिक असर

महोबा विवाद सिर्फ इसी एक घटना तक सीमित नहीं रहा। भाजपा के पूर्व विधायक आनंद शुक्ला ने भी सोशल मीडिया पर खुलकर संबोधन करते हुए मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के खिलाफ जमीन पर कार्यों की सच्चाई को सामने लाने की अपील की है। उन्होंने ग्राम पंचायतों से बेलाग फोटो-वीडियो साक्ष्य साझा करके वास्तविक स्थिति दिखाने का अनुरोध किया है ताकि निर्णय लेने में पारदर्शिता बनी रहे।

इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल बढ़ गई है। विपक्षी दलों ने भी इसका राजनीतिक उपयोग करना शुरू कर दिया है और मुद्दों को 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव के पूर्व संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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