काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी में गुरुवार 29 जनवरी 2026 को दो छात्रावासों— रुइया हॉस्टल और बिरला हॉस्टल के छात्रों के बीच गंभीर झड़प हुई, जिसमें पत्थरबाजी और लाठी-डंडे का इस्तेमाल किया गया। यह घटना शुरू में एक व्यक्तिगत विवाद के रूप में सामने आई, लेकिन बाद में दोनों पक्षों के बीच हिंसक टकराव में बदल गई।
वाराणसी BHU में हुए घटना का क्रम और कारण
खबरों के अनुसार, रुइया हॉस्टल के पीजी छात्र पीयूष तिवारी पर बुधवार दोपहर को बिरला हॉस्टल के कुछ छात्रों ने हमला कर गंभीर रूप से चोट पहुँचाई। यह हमला पुराने विवादों और रंजिश के चलते हुआ माना जा रहा है।
पीयूष पर हमला होने की खबर फैलते ही रुइया हॉस्टल के कई छात्र बिरला चौराहे पर जमा हो गए। दोनों तरफ छात्रों के बीच कहासुनी और बहस तेज़ होती चली गई, जो जल्दी ही लाठी-डंडे, हॉकी और पत्थरबाजी तक पहुँच गई। कुछ छात्रों ने अपने चेहरे पर कपड़े बांधे और हिंसा में शामिल हुए।
बवाल के दौरान घायल छात्र को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जबकि परिसर में अफरा-तफरी फैल गई। छात्रों की पत्थरबाजी और संघर्ष को देखते हुए विश्वविद्यालय में प्रॉक्टोरियल बोर्ड और पुलिस बल सहित पीएसी (प्रशासनिक बल) को बुलाया गया। भारी पुलिस फोर्स ने स्थिति को नियंत्रित किया और मौके पर विज़िलेंस बढ़ाई गई।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
डीसीपी काशी ज़ोन गौरव बंसवाल ने बताया कि दोनों हॉस्टलों के बीच विवाद का इतिहास रहा है और इसी पुरानी रंजिश की वजह से यह हिंसा भड़क उठी। पुलिस ने छात्रावासों में छानबीन की और कई अनाधिकृत रूप से हॉस्टल में रह रहे पूर्व छात्रों को चिन्हित किया, जिनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। ड्रोन कैमरों की मदद से निगरानी भी की गई।
हालात काबू में होने के बाद पुलिस और प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने परिसर में शांति बहाली सुनिश्चित की। घटना के आधार पर FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई और जो छात्र हिंसा में शामिल पाए गए हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
इस घटना ने एक बार फिर विश्वविद्यालय प्रशासन और सुरक्षा तंत्र की तैयारी और अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर इस तरह के पुराने विवादों को समय रहते काबू में न रखने के मुद्दे पर।
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