अयोध्या से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है जहां जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशान्त कुमार सिंह ने अपने आधिकारिक पद से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में उठाया है। उनका कहना है कि उन्होंने जिस सरकार के लिए काम किया, अगर उसके शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अभद्र टिप्पणियाँ हों तो वह उन पर मौन नहीं रह सकते।
1.इस्तीफे का मुख्य कारण और भावनात्मक निर्णय
प्रशान्त कुमार सिंह, जो वर्ष 2023 से अयोध्या में जीएसटी विभाग के डिप्टी कमिश्नर के रूप में तैनात थे, ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कथित रूप से की गई टिप्पणियाँ उन्हें आहत करती हैं। उन्होंने कहा कि वह जिस सरकार के वेतन पर काम करते हैं, उसके नेतृत्व का अपमान वे सहन नहीं कर सकते।
इस्तीफा भेजने के बाद वह भावुक भी हो गए और फोन पर अपनी पत्नी से बात करते हुए रोते हुए कहा कि यह निर्णय उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर आधारित लिया है। उन्होंने यह भी बताया कि वह “जिसका नमक खाते हैं, उसका सम्मान करना चाहिए” — ऐसा मानते हैं और इसी भावना के साथ उन्होंने इस्तीफा दिया है।
2. प्रशान्त कुमार सिंह की पृष्ठभूमि और भविष्य की योजना
प्रशान्त कुमार सिंह उत्तर प्रदेश के एक अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी माने जाते हैं। 2013 में सरकारी सेवा से जुड़े, और उनका करियर सहारनपुर से शुरू हुआ था। बाद में उन्हें अयोध्या में पोस्टिंग मिली, जहां उन्होंने लगभग दो साल तक जीएसटी विभाग की जिम्मेदारियाँ निभाईं।
इस्तीफा देने के बाद प्रशान्त कुमार सिंह ने कहा है कि वह सरकार की आलोचना करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ मौन नहीं रह सकते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका यह कदम किसी दबाव या राजनीतिक मजबूरी के कारण नहीं, बल्कि स्वयं की आस्था और नैतिक मूल्यों के अनुसार लिया गया निर्णय है। इसके बाद उन्होंने संकेत दिया है कि वे अपने निजी संसाधनों से सामाजिक कार्यों और राष्ट्रसेवा में योगदान देना चाहते हैं।
3. विवाद और आलोचनाएँ
इस फैसले के बाद विवाद भी तेज़ हुआ है। प्रशान्त सिंह के सगे भाई विश्वजीत सिंह ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र दिखाकर नौकरी प्राप्त की थी। यह आरोप प्रशासनिक मामलों में एक नई बहस का मुद्दा बना हुआ है।
साथ ही कई लोगों ने प्रशान्त कुमार सिंह के निर्णय को राजनीतिक रूप से भी देखा है। कुछ हलकों का मानना है कि इस तरह का इस्तीफा राजनीतिक समर्थन जताने का तरीका हो सकता है, जबकि समर्थक इसे नैतिक साहस का उदाहरण मानते हैं।
