बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के समीकरण बदलते माहौल में मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) एक बड़ा विवाद बन गया है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की त्रुटियों को दूर करने के लिए SIR प्रक्रिया लागू की, लेकिन इस पर राजनीति तेज़ हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे मतदाता अधिकारों पर हमला बताया, जबकि चुनाव आयोग और सत्ताधारी दल ने इसे नियमित लोकतांत्रिक प्रक्रिया बताया।
SIR प्रक्रिया: क्या है मामला?
विशेष गहन संशोधन (SIR) का उद्देश्य मतदाता सूची की सफ़ाई करना है – मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट मतदाताओं के नाम हटाना और सूची की सटीकता बढ़ाना। चुनाव आयोग का कहना है कि यह कार्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए ज़रूरी है और सभी मतदाताओं की सूची सही बनानी चाहिए।
हालांकि इस प्रक्रिया के बाद 65 लाख से भी अधिक नाम हटाए गए ऐसे मतदाताओं के रूप में प्रकाशित हुए, जो विवाद का मुख्य कारण बने। विपक्ष का कहना है कि यह हटाए गए नामों में गरीब, दलित, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के वोट भी शामिल हैं, जिससे “एक व्यक्ति – एक वोट” का सिद्धांत प्रभावित होता है।
राहुल गांधी का हमला और वोटर अधिकार यात्रा
कांग्रेस के सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने SIR प्रक्रिया पर भारी विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की “साझेदारी” से मतदाता सूची में हेराफेरी की जा रही है, ताकि चुनाव में फायदा उठाया जा सके। उन्होने इसे “वोट चोरी” बताया और बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ शुरू की।
यह यात्रा लगभग 1,300 किलोमीटर लंबी और 23 जिलों में फैली थी, जिसमें राहुल गांधी के साथ कई विपक्षी नेताओं ने भी हिस्सा लिया। यात्रा का उद्देश्य लोगों को मतदाता सूची की गोपनीयताओं और संभावित अनियमितताओं के प्रति जागरूक करना था।
राहुल गांधी ने कहा कि SIR प्रक्रिया से नक़ली मतदाता कम नहीं बल्कि असली मतदाता प्रभावित हो रहे हैं, और यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होने इसे संविधान के खिलाफ जाने की कोशिश बताया।
चुनाव आयोग और बीजेपी का पलटवार
चुनाव आयोग ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और कहा कि SIR प्रक्रिया सिर्फ़ सूची को साफ़ करने के लिए थी, न कि किसी पक्ष को फायदा पहुँचाने के लिए। आयोग ने राहुल गांधी से औपचारिक शिकायत दर्ज कराने को कहा, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया।
सत्ताधारी दल भाजपा ने भी कांग्रेस और राहुल गांधी पर हमला किया कि उन्होंने कोई औपचारिक शिकायत नहीं की, और SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों के बारे में कहने का कोई ठोस प्रमाण नहीं पेश किया।
जनता और परिणाम
बिहार में एक सर्वे के अनुसार, जनता SIR को लेकर विभाजित है – लगभग 40% लोग इसे पारदर्शी मानते हैं, वहीं 40% को लगता है कि यह प्रक्रिया सही नहीं है। कई लोगों ने कहा कि उनकों सूची में नाम जोड़ने या हटाने के दौरान परेशानी हुई।
मतदाता सूची विवाद और ‘वोटर अधिकार यात्रा’ ने चुनावी राजनीति में नए आयाम जोड़ दिए हैं। यह मामला सिर्फ़ मतदाता सूची तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोकतंत्र, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और राजनैतिक नैरेटिव की लड़ाई बन गया है।
Read More : योगी आदित्यनाथ नोएडा दौरे से पहले पढ़ लीजिए ये खबर, ट्रैफिक डायवर्जन लागू, इन रास्तो पर होगी भींड
