उत्तर प्रदेश में जनता-समस्याओं के समयबद्ध समाधान को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक सख्त प्रशासनिक कदम उठाया है। अब प्रदेश के जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) को प्रतिदिन अपने कार्यालय में दो घंटे जनसुनवाई के लिए उपस्थित रहना अनिवार्य होगा, और इसकी निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा की जाएगी।
यह फैसला 19 फरवरी 2026 को जारी आदेश का हिस्सा है, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसुनवाई में ढिलाई और लापरवाही को बर्दाश्त न करने की चेतावनी दी है।
जनसुनवाई पर सख्त हुई योगी आदित्यनाथ सरकार, अधिकारियों को कड़े निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह निर्णय लिया है, क्योंकि पिछले कुछ समय में जनसुनवाई के मामलों का समाधान जिलास्तर पर प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा था, जिससे शिकायतकर्ताओं को असुविधा का सामना करना पड़ रहा था और सरकार की छवि पर भी असर पड़ रहा है।
अब हर कार्यदिवस सुबह 10 बजे से दो बजे तक DM और SSP को अपने कार्यालय में लाइव जनसुनवाई करनी होगी, जिसका सीधा मॉनिटरिंग CMO करेगा। इन वीसी मीटिंगों में अधिकारी मोबाइल फोन या किसी अन्य स्थान से जुड़ नहीं सकेंगे — उन्हें कार्यालय में ही उपस्थित रहना अनिवार्य है।
मुख्यमंत्री कार्यालय यह भी देखेगा कि अधिकारी समय पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) से जुड़ें और अधिकारी के नाम तथा जिला स्पष्ट रूप से दिखाई दे। इसके साथ कुछ शिकायतकर्ताओं के साथ संवाद भी किया जाएगा, ताकि यह जाँच की जा सके कि समस्याओं का समाधान कितनी गुणवत्ता के साथ किया जा रहा है। ऐसे सभी विवरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने प्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत किए जाएंगे।
इस कदम का उद्देश्य प्रशासन को जन समस्याओं के प्रति अधिक उत्तरदायी और संवेदनशील बनाना है। सरकार चाहती है कि साधारण से साधारण शिकायत भी समयबद्ध, निष्पक्ष और संतोषजनक तरीके से निस्तारित हो — चाहे वह पुलिस-प्रशासन से जुड़ा मामला हो या प्रशासनिक सेवा से। प्रणाली में निरंतर निगरानी से लापरवाही और ढिलाई जैसे मामलों को रोका जाएगा।
सार्वजनिक शिकायत समाधान में जवाबदेही और प्रभाव
यूपी में जनसुनवाई की मॉनिटरिंग की यह व्यवस्था पहले से जारी जनता दर्शन और शिकायत निस्तारण कार्यक्रम का ही विस्तार है, जिसमें मुख्यमंत्री स्वयं भी लोगों से सीध संवाद करते रहे हैं और अफसरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि जनहित के मामलों को प्राथमिकता से निपटाया जाए।
उदाहरण के तौर पर, गोरखपुर के जनता दर्शन में सीएम योगी ने अधिकारियों को कहा था कि यदि किसी मामले में गलत जांच रिपोर्ट लगाई गई हो तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और ऐसे मामलों में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब सीएम कार्यालय द्वारा सीधे मॉनिटरिंग के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जिलों में जनसुनवाई और शिकायत निस्तारण प्रक्रियाएँ सिर्फ कागजी नहीं बल्कि व्यवहारिक रूप से प्रभावी हों। इससे प्रशासन की जवाबदेही बढ़ेगी और जनता को न्याय तथा समाधान तक पहुंचने में आसानी होगी।
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