'मैं कभी वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर नहीं बन सकता, मुझे ये एहसास हो गया..'
'मैं कभी वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर नहीं बन सकता, मुझे ये एहसास हो गया..'

भारतीय क्रिकेट टीम के वर्तमान मुख्य कोच राहुल द्रविड़ जोकि द वॉल के नाम से जाने जाते है। एक समय में वो भारत के लिए ही नहीं बल्कि विश्वकप राहुल द्रविड़ धैर्य का पर्याय थे। राहुल द्रविड़ के समय टीम इंडिया का हिस्सा विस्फोटक खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग, 100 शतक बनाने वाले सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण जैसे बल्लेबाज थे।

इन बल्लेबाजो की शैली से अलग बल्लेबाजी राहुल द्रविड़ की थी। राहुल द्रविड़ का नाम विस्फोटक खिलाड़ियों में नहीं गिना जाता है लेकिन विरोधी गेंदबाजों के लिए राहुल द्रविड़ एक बड़ी परेशानी साबित होते थे। लेकिन राहुल द्रविड़ का खुद के विषय में क्या कहना है आइए जानते हैं।

ऊर्जा को चैनलाइज करना मेरे लिए गेम चेंजर था : राहुल द्रविड़

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राहुल द्रविड़ ने हाल ही में द जोन पॉडकास्ट में ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा के साथ बातचीत के दौरान कहा कि “अगर मैं अपने करियर को पीछे मुड़कर देखता हूं, तो ऊर्जा को चैनलाइज करना मेरे लिए एक गेम-चेंजर था। मैं वास्तव में अपनी मानसिक ऊर्जा को प्रसारित करने में सक्षम था। जब मैं अपने खेल के बारे में नहीं सोच रहा था, इसकी चिंता कर रहा था और उस पर चिंतन कर रहा था तब भी मैं बहुत सारी ऊर्जा खर्च करता था। मुझे तरोताजा होने की जरूरत थी”।

खुद को बताया वीरेंद्र सहवाग से बिल्कुल अलग

भारतीय क्रिकेट टीम के वर्तमान मुख्य कोच राहुल द्रविड़ स्वयं को अपने साथी खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग या सचिन तेंदुलकर से अलग खिलाड़ी मानते है। राहुल द्रविड़ ने कहा,

” अगर मैं सच कहूं तो मैं वीरू (वीरेंद्र सहवाग) जैसा कभी नहीं बनने वाला था। उन्होंने अपने व्यक्तित्व के कारण स्विच ऑफ करना बहुत आसान समझा। मैं उस स्तर तक कभी नहीं पहुंचने वाला था, लेकिन मैंने लाल निशानों को पहचानना शुरू कर दिया, मुझे एहसास हुआ कि जब मैं बहुत तेज हो रहा था। मुझे पता था कि मुझे इसे बंद करने का एक तरीका खोजने की जरूरत है, लेकिन यह उस चीज का मानसिक पक्ष था जिसकी आपको खुद की मदद करने की जरूरत है”।

मानसिक रूप से स्विच ऑफ करना जिम कर अभ्यास की तरह ही है जरूरी

Rahul Dravid WI

राहुल द्रविड़ ने अपने अनुभव को साझा करते हुए आगे कहा कि,

“यह आपके लिए उतना ही महत्वपूर्ण था जितना कि जिम और अभ्यास सत्रों में अतिरिक्त घंटे बिताना। यदि आपने वह सब किया, लेकिन मानसिक रूप से स्विच ऑफ करने में असमर्थ थे, तो आपके पास खेल खेलने के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं होगी। एक बार जब मैंने अपने करियर में तीन या चार साल को पहचानना शुरू कर दिया, तो मैंने बहुत अधिक स्विच ऑफ करने का प्रयास करना शुरू कर दिया और इससे मुझे बहुत मदद मिली। जैसे-जैसे मेरा करियर आगे बढ़ा, मुझे एहसास हुआ, मैं कभी भी ऐसा नहीं बनने वाला था जो सहवाग की तरह तेजी से स्कोर कर रहा हो या शायद उस हद तक जितना सचिन ने किया था। मुझे हमेशा धैर्य की जरूरत थी। मुझे अपने और गेंदबाज के बीच का वह मुकाबला पसंद आया, मैंने इसे आमने-सामने की प्रतियोगिता बनाने की कोशिश की। मैंने पाया कि इससे मुझे थोड़ा और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली”।

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