किसान आंदोलन: जानिए कौन है दिल्ली पुलिस का ये जांबाज सिपाही, जो गले पर तलवार होने पर भी नहीं डरा

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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक तस्वीर काफी ज्यादा वायरल हो रही है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के द्वारा एक निहत्थे पुलिसकर्मी पर तलवार तानी गई है। हम आपको बता दें कि जिस पुलिसकर्मी के ऊपर तलवार तानी हुई दिखाई दे रही है, वे मंडावरी थाने के एसआई दयाचंद जी हैं। अक्षरधाम के पास में 26 जनवरी के मौके पर ट्रैक्टर परेड में हुए हंगामे के दौरान यह तस्वीर ली गई थी, जो कि सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा वायरल हो रही है।

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तलवार का लाठी से किया मुकाबला

26 जनवरी गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर परेड के दौरान काफी ज्यादा उपद्रव हुआ था। जहां पर प्रदर्शनकारियों ने निहत्थे पुलिसकर्मियों के ऊपर तलवार तानी थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि, अगर नई दिल्ली की तरफ नहीं बढ़ने दिया गया तो वह गर्दन काट कर अलग कर देंगे। इतनी खतरनाक बात सुनकर किसी की भी हालत खराब हो सकती है लेकिन दिल्ली पुलिस ने इस तरह के अल्फाजों को सुनकर पीछे हटने की बजाय डटकर सामना किया। मौत को सामने खड़ा देखकर उपद्रवियों के सामने एस आई दया चंद जी और कांस्टेबल नितिन ने सिर झुकाने के बजाय लाठी से तलवार का सामना किया।

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मंगलवार की सुबह नई दिल्ली किसानो को जाने से रोकने के लिए 12 स्तरीय बैरिकेडिंग हुई थी। दया चंद जी भी अक्षरधाम के पास ही ड्यूटी में व्यस्त थे। इसी दौरान वहां पर अचानक बड़ी संख्या में ट्रैक्टर ट्राली के साथ लोग पहुंचे और तोड़फोड़ करने लगे। जब इन उपद्रवियों को पुलिस ने रोकने की कोशिश की, तो यह सभी बैरिकेट्ड पर चढ़ गए और पुलिस के सामने तलवार तान दी।

 

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बाल-बाल बचे दया चंद

दया चंद जी बताते हैं कि,

“प्रदर्शनकारियों के द्वारा तलवारों से हमला किया जा रहा था, लेकिन उन्होंने किसी तरह से भी खुद को बचाया। अचानक उनके ऊपर तलवार से हमला होने ही वाला था, तभी कॉन्स्टेबल नीतीश ने बीच में डंडा ला दिया। इसके बाद वे साफ-साफ बच गए। जिन्हें हम लोग अन्नदाता समझते हैं, कभी नहीं सोचा था कि वह 1 दिन पुलिस के साथ ऐसा कर सकते हैं। इस दौरान हमारी जान भी जा सकती थी। हमने कभी नहीं सोचा था कि, जिनको हम अन्नदाता समझते थे, वे 1 दिन पुलिस के साथ इस तरह का व्यवहार कर सकते हैं”।

कॉन्स्टेबल नितिन ने बताया कि,

“पुलिस का पहला धर्म है कि, वह लोगों की सुरक्षा पर पूरा ध्यान दें। जब वे पहली बार पुलिस में भर्ती हुए थे, तो उनके मन में डर बिल्कुल भी नहीं बचा था। इस वजह से उन्होंने तलवार से ना डर कर हिम्मत के साथ पूरा मुकाबला किया”।

दयाचंद और नितिन ने ऐसी परिस्थितियों में हिम्मत दिखाई और डटकर मुकाबला किया। उन्होंने तलवार के आगे ढाल बनकर खाकी वर्दी पर आंच नहीं आने दी।

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