खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा ये शख्स, फिल्म “कागज” से मिलती है स्टोरी

shayam bihari

यूपी में अच्छे खासे लोगों को मुर्दा करने का काम जोरो शोरों से चल रहा है। ऐसी ही एक घटना उत्तर प्रदेश के गोंडा में देखी गई है, जहां एक 85 वर्ष का बुजुर्ग अपने को ही जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों की ठोकरें खा रहा है। जी हां, इस बुजुर्ग का नाम श्याम बिहारी है, जिनके पास केवल एक ही काम है कि वह खुद को जिंदा साबित करने के लिए दिन भर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटता है और शाम को वापिस अपने घर लौट जाता है।

इस प्रक्रिया से कट रहा जीवन

shayam bihari

अगले दिन फिर से उसका यही सिलसिला शुरू होता है, लोग अक्सर उन्हें केवल इसी काम के लिए विकास भवन में मशक्कत करते हुए देखते हैं। हैरत की बात है कि प्रशासन की इस गफलत के चक्कर में उसकी वृद्ध अवस्था के तहत मिलने वाली पेंशन भी रोक दी गई है।

यह भी पढ़े: चाय बेचने वाले की बेटी ने रचा इतिहास कड़ी मेहनत से बनी इंडियन एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर

बुजुर्ग श्याम बिहारी गौंडा के पंडरी कृपाल ब्लाक के मंडरेवा कला के गांव के रहने वाले हैं। 85 साल की उम्र में उनके पास केवल एक ही काम बचा है कि वह किसी तरह से खुद को जिंदा साबित करवा लें। इसके बाद उनकी पेंशन बहाल हो जाए और वह अपना खर्चा चला सकें।

अफसरों ने कही ये बात

shayam bihari

मामला खबरों में उड़ने के बाद जिला समाज कल्याण अधिकारी भी हरकत में आ गए हैं। उनका कहना है कि वह इस पूरे प्रकरण की जांच करवा रहे हैं। जिस भी कर्मचारी ने ऐसा किया है, जल्द ही जांच में सामने आ जाएगा। दोषी कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि भूल सुधार का काम किया जा रहा है। जल्द ही बुजुर्ग की पेंशन बहाल करवा दी जाएगी। इस खबर को देखने के बाद सच में यह अहसास होता है कि एक छोटे से कर्मचारी की छोटी से गलती किसी व्यक्ति के लिए जीवन मरण का प्रश्न बन जाती है। अब देखना ये है कि यूपी के इस भूत को असल जीवन मे जिंदा होने कि पहचान कब मिलती है?

यह भी पढ़े: ‘आजादी पत्र’ में पिता लालू यादव का नाम तक सही से नहीं लिख पाए बेटे तेजप्रताप यादव, गलतियों की है भरमार