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दोस्त के एक्सीडेंट और मौत ने बदल दी इस शख्स की जिंदगी, फ्री हेलमेट बांटने के लिए छोड़ दी नौकरी और बेच दिया घर

helmet man

आप लोगों ने रिश्तेदारों और दोस्तों के किस्से तो बहुत सुने होंगे, लेकिन कभी आपने सुना है कि किसी समाजसेवा के भाव में खुद अपना घर तक बेंच दिया हो। आज हम आपकों ऐसे ही एक आदमी और उनकी पत्नी के इस समाजसेवी कार्य के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर आप खुद चौंक जाएंगे। दोनों पति-पत्नी जनसेवा के इस जज्बे को लेकर जरूरतमंद लोगों के प्रति खुद को समर्पित किए हुए हैं। आइए जानते हैं इस पति पत्नी के बारे में….

मित्र को सड़क हादसे में खोने के बाद लिया फैसला

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यह दंपति खुद पैसों की तंगी से जूझ रहे थे, इसके बाद भी इन्होंने लोगों की सेवा करने के फैसले को पीछे ना किया। हेलमेट मैन के नाम से पहचाने जाने वाले इस व्यक्ति का नाम राघवेंद्र हैं। गरीब लोगों के लिए एक मसीहा का काम करते हैं। बिहार के कैमूर जिले के रहने वाले राघवेंद्र राव ने साल 2014 में एक सड़क हादसे में अपने बहुत ही प्यारे मित्र को खो दिया था।

इस घटना के बाद से राघवेंद्र को गहरा धक्का लगा था। ऐसे हादसे में किसी और की जान ना जाए, इसे उन्होंने एक अभियान के तौर पर लिया और अपनी नौकरी करने के साथ साथ संभव मोटरसाईकिल चलाने वालों को मुफ्त में हेलमेट बांटने लगे।

48000 से ज्यादा बाटें हेलमेट

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घर में तंगी होने पर उन्होंने अपना घर तक बेंच दिया। अब तक वह करीब 48000 से भी अधिक लोगों को हेलमेट बांट चुके हैं। उनका मानना है कि हेलमेट पहनकर बाईक चलाने से सडक़ हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है। राघवेंद्र ने अपने इस अभियान को 22 राज्यों तक फैला दिया है। हेलमेट के साथ राघवेंद्र ने बच्चों को पढ़ाई के लिए किताबें बांटी।

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इसके लिए बकायदा उन्होंने एक निशुल्क बुक शॉप भी खोली है, जहां लोग अपनी किताबों का दान कर सकते हैं और जरूरतमंद बच्चे वहां से अपनी जरूरत की किताबें ले जा सकते हैं। उनकी पत्नी ने भी गहने बेचकर उन्हें ये काम ना रोकने की प्रेरणा दी। इस तरह से वह अपने सेवाभाव के अभियान को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।

बीमा भी करवाते हैं राघवेंद्र

हेलमेट मैन

राघवेंद्र ने बताया कि एक ऐसा परिवार उनको मिला, जहां सड़क हादसे में एक परिवार ने अपने घर का सदस्य खो दिया। इसके बाद से वह जिन लोगों को निशुल्क हेलमेट देते हैं, उनका पांच लाख का बीमा भी कर देते हैं। इसके एवज में वह मात्र 1 हजार रुपए शुल्क लेते हैं, जोकि बीमा कंपनी की फीस होती है। इस तरह से वह लोगों का जीवन बचाने के साथ साथ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति के प्रति भी लोगों को जागरूक करते हैं।

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