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बीमार पिता को गुडगांव से घर लेकर आई थी दरभंगा की ज्योति, अब आलीशान घर की मालकिन है बिहार की बिटिया

darbhanga ki jyoti

बीमार पिता को हरियाणा के गुरूग्राम से बिहार के दरभंगा तक साईकिल पर बिठाकर लाने वाली ज्योति को साईकिल गर्ल का खिताब मिलने के बाद उसकी व उसके परिवार की जिदंगी पूरी तरह से बदल गई है। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इस साइकिल गर्ल के नाम से विख्यात दरभंगा की बेटी ज्योति कुमारी की बहादुरी की जमकर तारीफ की।

कोरोना संकट में लॉकडाउन के दौरान दरभंगा की इस साहसी बेटी ने अपने बीमार पिता को साइकिल पर बिठाया और हरियाणा के गुरुग्राम से 1200 किमी की दूरी तय करते हुए सिंहवाड़ा प्रखंड के सिरहुल्ली गांव पहुंची थी। अत्यंत निर्धन परिवार की, लेकिन हिम्मत की धनी ज्योति का चयन प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2021 के लिए किया गया है।

वर्चुअल मुलाकात में प्रधानमंत्री के मुंह से तारीफ से गदगद ज्योति ने कहा कि उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि देश के प्रधानमंत्री से उसकी वर्चुअल मुलाकात होगी। ज्योति की आंखों की चमक और चेहरे की मुस्कान उसके हौसले और आत्मविश्वास की गवाही दे रही थी।

समय के अभाव में की वर्चुअल मुलाकात

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राष्ट्रीय बाल पुरस्कार की विभिन्न श्रेणियों में ज्योति का चयन बहादुरी के लिए किया गया है। ज्योति को आज यानि की गणतंत्र दिवस के मौके पर परेड में शामिल होने दिल्ली जाना था, लेकिन कोरोना के कारण इस पुरस्कार के लिए चयनित बच्चों को दिल्ली नहीं बुलाकर वर्चुअल संवाद में पुरस्कार की घोषणा की गयी। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इन बच्चों के काम की तारीफ की।

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ज्योति को प्रधानमंत्री की ओर से एक लाख रुपए का चेक, प्रमाणपत्र और मेडल दिया जाएगा। वर्चुअल संवाद में प्रधानमंत्री को देशभर के 32 बच्चों से बात करनी थी। लेकिन समय के अभाव में ज्योति से उनकी सीधी बात नहीं हो पायी। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने दरभंगा की इस साहसी बेटी की जमकर तारीफ की।

लॉकडाउन के समय किया संघर्ष

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ज्योति के पिता मोहन पासवान का कहना है कि ज्योति के साईकिल गर्ल बनने से पहले उनका पूरा परिवार आर्थिक संकट में घिरा हुआ था। वह एक कमरे के मकान में किसी तरह से गुजर बसर कर रहे थे, लेकिन अब हालात बदल गए हैं और वह तीन मंजिल के मकान में संपन्न तरीके से जीवन जी रहे हैं।

मोहन पासवान कहते हैं कि दिल्ली में वह एक एक्सीडेंट का शिकार हो गए थे। तब उनकी पत्नी, दामाद और बेटी उनका हालचाल जानने के लिए आए थे। उनकी स्थिति को देखकर ज्योति ने उनके पास रहकर ही उनकी सेवा करने का निर्णय लिया था। इसके बाद लॉकडाउन लग गया, जिसके कारण ज्योति साइकिल पर अपने पिता को बिहार लेकर आई।

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